डॉक्टरों का आरोप, जे.जे. अस्पताल में सामान्य जांच तक की सुविधा नहीं सरकार का समस्या नहीं, मेस्मा पर ध्यान!
मुंबई: राज्य सरकार के सबसे बड़े जे.जे. अस्पताल में बेसिक जांच
और दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र
असोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) ने के अनुसार, अस्पताल में कंप्लीट ब्लड काउंट
(सीबीसी) की भी सुविधा नहीं है। सरकार की ओर से मार्ड को महाराष्ट्रा एसेंशियल सर्विस
मेंटेनेंस एेक्ट (मेस्मा) के तहत लाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए शनिवार को रेजिडेंट
डॉक्टरों ने यह खुलासा किया। अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि सीबीसी, सिरम
एलेक्ट्रोलाइट्स जांच के अलावा, मानसिक समस्या से परेशान मरीजों के इलाज की लिथियम
और हैलोपैरिडॉल जैसी दवाइयां नहीं है। मार्ड के अध्यक्ष डॉ. लोकेश चिरवटकर ने कहा कि
सरकार मार्ड के डॉक्टरों पर इसलिए मेस्मा लगाना चाहती है, ताकि सदस्य डॉक्टर अपनी आवाज
न उठा सकें। राज्य सरकार के सबसे बड़े अस्पताल में किसी भी तरह के बुखार के दौरान दी
जाने वाली बेसिक जांच की सुविधा तक नहीं है।
कई बार महत्वपूर्ण दवाओं और जांच की अनुपलब्धता के कारण डॉक्टरों
को परिजन की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है। नतीजतन, डॉक्टरों पर अटैक के मामले सामने
आते हैं। इसीलिए डॉक्टरों को सामूहिक छुट्टी पर जाना पड़ता है। सरकार जरूरी दवाइयों
और जांच की उपलब्धता पर ध्यान देने की बजाय अस्पताल में 24 घंटे से अधिक काम करने वाले
रेजिडेंट डॉक्टरों पर तानाशाही कानून थोप रही है।
उन्होंने बताया, ‘कुछ महीने पहले जे.जे. में हुए डॉक्टरों पर
अटैक के बाद सरकार ने हमें सुरक्षा का अश्वासन दिया था। इसमें अस्पताल में अलार्म सिस्टम
से लेकर सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने तक की बात शामिल थी। हालांकि एक बार फिर
आश्वासन ठंडे बस्ते में चला गया है। इस विषय को लेकर हम काफी समय से मेडिकल एजूकेशन
मिनिस्टर गिरीश महाजन और डायरेक्ट्रेट ऑफ मेडिकल एजूकेशन ऐंड रिसर्च के निदेशक प्रवीण
शिंगारे से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक हमें समय नहीं मिला। सरकार ने
बिना हमारी समस्या जाने, बिना बात किए हम पर मेस्मा लगाने का फैसला कर लिया। इसका हम
विरोध करते हैं।’
अस्पताल में सभी तरह की
जांचे की जा रही है। मार्ड द्वारा लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इस बारे में हम
मार्ड से बात करेंगे।
