वर्धा में बापू कुटी एवं दिल्ली में राजघाट : गाँधी जयंती क्यों मनाई जाती इसका क्या महत्व है?

भारत में गांधी जयंती प्रार्थना सभाओं और राजघाट नई दिल्ली में गांधी प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है, महात्मा गांधी की समाधि पर राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रार्थना आयोजित की जाती है, जहां उनका अंतिम संस्कार किया, उनका सबसे पसंदीदा और भक्ति गीत रघुपति राघव राजा राम उनकी स्मृति में गाया जाता है, पूरे भारत में इस दिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी आयोजित किया जाता है. अधिकतर स्कूलों में एक दिन पहले ही गांधी जयंती का उत्सव मनाया जाता है. ये सभी उत्सव जीवन के उन सिद्धांतों को प्रभावित करते हैं जो कि गांधी जी ने बताए थे, अनुशासन, शांति, ईमानदारी, अहिंसा और विश्वास. “पहले वह आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर आप पर हसेंगे, फिर आपसे लड़ेंगे और तब आप जीत जाएंगे" – महात्मा गाँधी भारत में कई स्थानों पर लोग बापू के प्रसिद्ध गीत "रघुपति राघव राजा राम" को गाते हैं, प्रार्थना करते हैं और स्मारक समारोह के माध्यम से गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हैं. इस दिवस को कला, विज्ञान की प्रदर्शनियों और निबंध की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. साथ ही अहिंसा और शांति को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये जाते हैं, गाँधी जयंती का क्या महत्व है? -इस दुनिया को शांति और अहिंसा का पाठ पढ़ानें की दिशा में महात्मा गांधी जी का योगदान सामानांतर है. उनकी शिक्षा यही है कि, सभी प्रकार के संघर्ष का समाधान अहिंसा से किया जाये. साथ ही इस विश्व में प्रत्येक बड़ी और छोटी समस्या का समाधान शांति और अहिंसा से निकाला जाये ताकि लोगों के रहने के लिए बेहतर माहौल का निर्माण किया जा सके. महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था जो करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी. गांधी जी अपने पिता की चौथी पत्नी की अंतिम संतान थे. उनके पिता ब्रिटिश राज के समय काठियावाड़ की एक छोटी सी रियासत (पोरबंदर) के दीवान थे. - वर्ष 1883 मई में साढ़े 13 साल की आयु पूरी करते ही उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा से कर दिया गया था. मोहनदास और कस्तूरबा के चार सन्तान हुईं जो सभी पुत्र थे. - गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान 1899 के एंग्लो बोएर युद्ध में स्वास्थ्यकर्मी के तौर पर मदद की थी. पर युद्ध के भयानक चित्र को देखकर उनहोंने हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने की ठान ली और इस प्रकार वे अहिंसा के रस्ते पर चल पड़े, - गांधी जी का सिविल राइट्स आंदोलन (Civil Rights Movement) कुल 4 महाद्वीपों और 12 देशों तक पहुंचा था. - गांधी जी ने साउथ अफ्रीका के डर्बन, प्रिटोरिया और जोहांसबर्ग में तीन फुटबॉल क्लब स्थापित करने में मदद की थी. इन तीनों क्लब का नाम एक ही था - "पैसिव रेसिस्टर्स सॉकर क्लब". - वर्ष 1931 में इंग्लैंड यात्रा के दौरान गांधी जी ने पहली बार रेडियो पर अमेरिका के लिए भाषण दिया था. रेडियो पर उनके पहले शब्द थे “क्या मुझे इसके अंदर (माइक्रोफोन) बोलना पड़ेगा?” “Do I have to speak into this thing?” वर्ष 1930 में उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने “वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति” का पुरुस्कार दिया था. महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता” (Rashtrapita) की उपाधि सुभाष चन्द्र बोस ने दी थी. 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गौड़से नामक व्यक्ति ने  गांधी जी को गोली मारकर हत्या कर दी थी. महात्मा गांधी की शवयात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी.  - गांधी जी ने अपनी आत्मकथा "द स्टोरी ऑफ़ माय एक्सपेरिमेंट्स विथ ट्रुथ" (The Story of My Experiments with Truth) में दर्शन और अपने जीवन के मार्ग का वर्णन किया है. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और गांधी जी के प्रयासों जैसे विषयों पर भारत में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रतियोगिताएँ, खेल, भाषण जैसी विभिन्न गतिविधियाँ 2 अक्टूबर को आयोजित की जाती हैं. इसमें कोई शक नहीं कि गांधी जी युवाओं के लिए एक आदर्श और प्रेरणादायक नेता है. स्वराज को हासिल करने के लिए गांधी जी ने बहुत अच्छा काम किया. उन्होंने किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार किया और अस्पृश्यता या छुआ-छात जैसी अन्य सामाजिक बुराइयों को भी समाज से समाप्त करना में मुख्य भूमिका निभाई. उन्होंने महिला सशक्तिकरण का भी समर्थन किया. वे एक महान नेता थे. इसलिए 2 अक्टूबर को गांधी जयंती देश में उनके सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए मनाई जाती है. "व्यक्ति की पहचान उसके कपड़े से नहीं उसके चरित्र से होती है" - महात्मा गांधी “आप जो भी करते हैं वह कम महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें” –

महात्मा गांधी माँ, खादी का कुर्ता दे दे, मैं गाँधी बन जाऊँ,

सब मित्रों के बीच बैठ फिर रघुपति राघव गाऊँ!

निकर नहीं धोती पहनूँगा, खादी की चादर ओढूँगा,

घड़ी कमर में लटकाऊँगा, सैर सवेरे कर आऊँगा!

मैं बकरी का दूध पिऊँगा, जूता अपना आप सिऊँगा!

आज्ञा तेरी मैं मानूँगा, सेवा का प्रण मैं ठानूँगा!

मुझे रुई की पूरी दे दे, चर्खा खूब चलाऊँ,

माँ, खादी की चादर दे दे, मैं गाँधी बन जाऊँ! कमला चौधरी

“व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही

बन जाता है” – महात्मा गांधी “मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर

आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन” –

महात्मा जिस बापू ने सारे जग में

हिन्दुस्तान का नाम किया

उस पर ही इक घात लगाकर

अनहोनी ने काम किया

बापू ने बस राम कहा और

चिर निद्र में विश्राम किया

यह संसार नमन करता है

आजादी की शान को

हम श्रद्धा से याद करेगें

गाँधी के बलिदान को |

प्रेषक लेख - डॉ. नेहा नेमा, असिस्टेट प्रोफेसर आलाप कालेज गुना मप्र सम्बद्ध माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल मप्र