महाराष्ट्र में मैंग्रोव संरक्षण से जलवायु ठीक होगी: पर्यावरणविद देवी गोयनका
मुंबई :जाने-माने पर्यावरणविद देवी गोयनका ने कहा है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने मैंग्रोव नष्ट न करने का जो आदेश दिया है उससे महाराष्ट्र के, खासकर तटीय इलाकों में पर्यावरण और जलवायु का रख-रखाव करने में मदद मिलेगी। साथ ही जब समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, ऐसी दशा में तटीय आबादी को मैंग्रोव ही बचा सकेंगे। मैंग्रोव से समुद्र तटीय इलाकों या अन्य जगहों की मिट्टी का कटाव रोकने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले को पाने में 14 साल लग गए और इस दौरान इस मुद्दे पर कानून के जानकार जैसे नवरोज सीरवई, जय छाबडिया, गुलनार मिस्त्री और जयकर ने इस विषय पर कोर्ट में पैरवी की। इन लोगों का कहना है कि 2005 में मुंबई में जो जल भराव की समस्या हुई थी, उसका एक बड़ा कारण मैंग्रोव नष्ट करना था।
गोयनका ने यह टिप्पणी न्यायालय के न्यायाधीश अभय ओक और रियाज छागला द्वारा कंजरवेटिव ऐक्शन ट्रस्ट और बॉम्बे एनवायरनमेंटल ऐक्शन ग्रुप द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिए गए अपने फैसले पर की है। यह याचिका 2004 में ही दायर की थी। 2006 में कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया था। गोयनका इस याचिका में याचिका दायर करने वालों में दूसरे नंबर पर थे।
