ढुलाई की लागत बढ़ने की वजह से बंदरगाहों से ढुलाई का बंटाधार
मुंबई, महंगाई की मार झेल रही जनता को उबारने में सरकार असफल सिद्ध हुई है। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण देश को आंतरिक के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। त्योहारी सीजन की वजह से उम्मीद थी कि नवंबर महीने में लॉजिस्टिक्स सेक्टर को गति मिलेगी लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आए उतार-चढ़ाव और ढुलाई की लागत बढ़ने की वजह से बंदरगाहों से ढुलाई का बंटाधार हो गया। तो वहीं हिंदुस्थान का मित्र माना जानेवाला ईरान भी अब लगातार झटके देने लगा है।
बता दें कि सरकारी बंदरगाहों पर नवंबर महीने में सिर्फ १९ लाख टन कार्गो का संचालन किया गया है। इसके साथ ही देश के १२ बड़े बंदरगाहों से नवंबर में महज ६१३ लाख टन ढुलाई हुई। हिंदुस्थान को विश्वगुरु बनाने का सपना दिखाने वाले पीएम मोदी को अब तक मित्र रहे ईरान से भी जोरदार झटका लगा है। ईरान ने हिंदुस्थान के चाय और चावल-दाल के आयात को ही बंद कर दिया है। बताया गया है कि उच्च गुणवत्ता वाली चाय और चावल जैसी वस्तुएं पिछले एक सप्ताह से ठप पड़ी हैं। फिलहाल अधिकारियों की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है और तेहरान दूतावास से भी प्रतिक्रिया में देर लग रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अतंरराष्ट्रीय व्यापार में मंदी इसके पीछे बड़ी वजह है। साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि निकट भविष्य के हिसाब से सुस्त रफ्तार बनी रहेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक ढुलाई में कमी या बढ़ोतरी पश्चिमी देशों के आर्थिक संकेतकों में बदलाव पर निर्भर होगी। तैयार सामानों का कारोबार खासकर कमजोर रहा है। पहले ७ महीनों में कंटेनर ट्रैफिक में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में महज १.५ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इक्रा में वाइस प्रेसीडेंट और सेक्टर हेड साई कृष्णा ने कहा कि चालू साल में कंटेनर सेग्मेंट की मात्रा कमजोर रही है। यहां तक कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में १२ प्रमुख बंदरगाहों का संयुक्त कार्गो ६५० लाख पार नहीं कर पाया, वहीं पिछले ३ महीने में यह ६१० लाख टन रहा। कंटेनर सेग्मेंट में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता जारी है।
भारतीय संघ चाय के सचिव (निर्यात) सुजीत पात्रो ने कहा कि ईरान का यह पैâसला एक बड़े चिंता का विषय है, क्योंकि हिंदुस्थान बड़ी मात्रा में ईरान से उच्च गुणवत्ता वाली पारंपरिक चाय की उम्मीद करता है। असम से पारंपरिक चाय अधिक मात्रा में ईरान जाती है। ईरान के बाजार में भारतीय चाय की काफी अधिक मांग है। पात्रो ने स्पष्ट किया कि बाजार की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के कृषि मंत्रालय ने प्रोफार्मा के पंजीकरण के आदेश को रोक दिया है। चूंकि प्रोफार्मा जारी करना बंद हो गया है, जिससे ईरान सीमा शुल्क विभाग किसी भी जहाज को ईरान के किसी भी बंदरगाह पर बुलाने की अनुमति नहीं देगा। यही वजह है कि भारतीय, ईरान को चाय की खेप नहीं भेज रहे हैं। दूसरी तरफ बासमती चावल और उच्च गुणवत्ता वाली चाय के लिए ईरान, भारत का प्रमुख बाजार है। इसी तरह बासमती चावल के मामले में पिछले वित्त वर्ष में भारत से कुल बासमती चावल का एक हिस्सा ईरान गया।
