गेहूं का स्टॉक आधा! गेहूं के निर्यात पर रोक
मुंबई, गत महीने खुदरा महंगाई में कमी आने पर केंद्र सरकार अपनी पीठ भले ही थपथपा रही हो पर आनेवाले दिन अच्छे नहीं हैं। लोगों को रोटी पाने की राह में कांटा ही कांटा मिलनेवाला है। इसकी वजह है कि एक तो महंगाई की मार, ऊपर से केंद्र सरकार के स्टॉक में गेहूं का जितना कोटा होना चाहिए था, वह उसका आधा हो गया है। असल में पेट भरनेवाले मुख्य अनाज गेहूं का देश में स्टॉक काफी कम हो गया है। अगर पिछले साल के स्टॉक से तुलना करें तो इस समय देश के गोदामों में उसका आधा गेहूं ही मौजूद है। १४० करोड़ की आबादीवाले देश के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है।
बता दें कि हाल ही में गेहूं की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। आनेवाले दिनों में इसमें भारी बढ़ोतरी हो सकती है और कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार देश के सरकारी गोदामों में इस महीने की शुरुआत में २.१ करोड़ टन गेहूं का स्टॉक था, जो पिछले साल १ नवंबर को ४.२ करोड़ टन था।
हालांकि यह आधिकारिक लक्ष्य से थोड़ा ऊपर है। सरकार ने ३१ दिसंबर को खत्म होनेवाली तिमाही के लिए इसके २.०५ करोड़ टन रहने का लक्ष्य रखा था। गत १ अक्टूबर को सरकारी गोदामों में २.२७ करोड़ टन गेहूं था। सरकार समय-समय पर बल्क यूजर्स के लिए गेहूं का स्टॉक जारी करती रहती है। इनमें आटा मिल और बिस्कुट बनानेवाली कंपनियां शामिल हैं। हिंदुस्थान दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। गत मई में बढ़ती कीमत पर काबू पाने के लिए सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। तबसे देश में गेहूं की कीमत में २७ फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है। जानकारों का कहना है कि ६ महीने बाद नई फसल के आने तक गेहूं की कीमत नीचे आने की उम्मीद नहीं है और इसकी किल्लत बनी रहेगी। नई फसल मार्च-अप्रैल में आएगी। इस साल गेहूं की पैदावार में गिरावट आई थी। लेकिन अगले साल इसमें एक बार फिर तेजी की उम्मीद की जा रही है। देश में गेहूं की बुआई १ अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में गेहूं का रकबा ४५ लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले ९.७ फीसदी अधिक है। देश में गेहूं की कीमत गुरुवार को २६,५०० रुपए टन के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। मई में गेहूं के निर्यात पर बैन लगने के बाद से इसमें २७ फीसदी तेजी आ चुकी है। इस मामले में भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष अशोक मीणा ने कहा था कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी आवश्यकताओं के लिए मुफ्त अनाज की आपूर्ति के बाद भी १ अप्रैल, २०२३ तक गेहूं और चावल का अनुमानित स्टॉक सामान्य बफर मानदंडों से बहुत अधिक होगा।
