महंगाई और बेरोजगारी के कारण देश में बुरे दिन
मुंबई, देश में अच्छे दिन लाने का वादा करके केंद्र में मोदी सरकार आसीन हुई थी। पर धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। महंगाई और बेरोजगारी के कारण देश में बुरे दिन आ गए हैं। मगर महंगाई पर लगाम नहीं लगनेवाली है और अभी और भी बुरे दिन हावी होनेवाले हैं। खबर है कि देश का केंद्रीय बैंक आरबीआई रेपो रेट की दर बढ़ा सकता है। इससे अन्य बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिया जानेवाला कर्ज महंगा हो जाएगा।
गौरतलब है कि रेपो रेट के बढ़ने से देश में महंगाई का झटका लगता है। आरबीआई की तीन दिवसीय मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक आगामी २८ सितंबर से लेकर ३० सितंबर तक होनेवाली है। अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर के फिर से ७ फीसदी के लेवल पर पहुंचने के बाद माना जा रहा है कि आरबीआई लगातार चौथी बार पॉलिसी बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल फर्म ‘मार्र्गेन स्टेनली’ ने आशंका जताई है कि आरबीआई रेपो रेट में ०.५० फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। मार्र्गेन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पहले हमारा अनुमान था कि रेपो रेट में ३५ बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है। लेकिन महंगाई दर में तेजी और दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के रुख के बाद हमारा अनुमान है कि रेपो रेट में ०.५० फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है।
इससे पहले आरबीआई रेपो रेट में १.४० फीसदी की बढ़ोतरी कर चुका है। पहली बार आरबीआई मई, २०२२ में ४० बेसिस प्वाइंट, दूसरी बार जून में ५० बेसिस प्वाइंट और फिर अगस्त में ०.५० फीसदी की बढ़ोतरी रेपो रेट में कर चुका है और अब एक बार फिर रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मार्र्गेन स्टेनली के मुताबिक महंगे खाद्य वस्तुओं के चलते सितंबर महीने में भी खुदरा महंगाई दर ७.१ से ७.४ फीसदी के बीच रह सकता है। हालांकि इसके बाद जनवरी-फरवरी तक महंगाई दर में कमी आ सकती है और ये जनवरी-फरवरी २३ तक ६ फीसदी के ऊपर जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य महंगाई दर में उछाल के चलते महंगाई दर में तेजी बनी रह सकती है। बीते साल के मुकाबले धान और दाल की बुआई घटी है, तो कमोडिटी के दामों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी से आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिसके चलते खुदरा महंगाई दर बढ़ी रह सकती है।
