नागपुर : संदिग्धों की बढ़ती संख्या से टेंशन भी बढ़ा

नागपुर : सिटी में पाजिटिव मरीजों का आंकड़ा 18 तक पहुंच गया है, तीन दिन बाद फिर से नया पाजिटिव मरीज आने के बाद डाक्टर सतर्क हो गए हैं. इस बीच संदिग्धों की बढ़ती संख्या ने भी टेंशन बढ़ा दिया है. जिस तरह से राज्य में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसको देखते हुए प्रशासन ने तैयारी को चुस्त-दुरुस्त कर दिया है. मेडिकल में ट्रामा सेंटर को कोरोना हास्पिटल में तब्दील किया जा रहा है. वहीं मेयो में भी पृथक आईसीयू तैयार किया गया है.

सिटी में पाये गए 18 पाजिटिव में से अब तक 4 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है. जबकि मेडिकल में भर्ती 4 पाजिटिव की हालत स्थिर बनी हुई है. मेयो में भर्ती पाजिटिव मरीजों की अब तक दो बार जांच की जा चुकी है. इनमें से कुछ निगेटिव तथा कुछ पाजिटिव ही आए हैं. यही वजह है कि डाक्टर भी सतर्कता बरत रहे हैं. इस बीच मेडिकल के ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों को अन्य वार्डों में शि‌फ्ट किया जा रहा है. समूचे सेंटर को कोरोना अस्पताल में तब्दील करने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है. कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू की जरूरत होती है. यही वजह है कि आईसीयू से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

मेयो में भी कोरोना मरीजों के लिए पृथक आईसीयू बनाया गया है. दरअसल प्रशासन भविष्य में मरीजों की बढ़ने वाली संभावित संख्या के मद्देनजर सभी तैयारी कर रहा है. सप्ताहभर पहले तक लग रहा था कि सिटी में नये मरीज नहीं आएगे, लेकिन अचानक से एक पाजिटिव आने के बाद डाक्टर फिर से अलर्ट पर आ गए हैं. बताया जा रहा है कि अब तक क्वारंटाइन में रखे गए दिल्ली से लौटे लोगों के दूसरी बार नमूने लिये गए हैं. एक-दो दिनों में इनकी रिपोर्ट आएगी. डाक्टरों को भी इन्हीं रिपोर्ट्स की प्रतीक्षा है. इसकी एक वजह यह भी कि 15 दिन बाद भी संदिग्ध की रिपोर्ट पाजिटिव आ सकती है. यही वजह है कि डाक्टर किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं.

‌फिलहाल स्थिति यह है कि मेयो और मेडिकल में संदिग्ध मरीजों की मौत होने पर डाक्टरों का भी टेंशन बढ़ रहा है. रविवार को मेयो में दो वृद्धों की मौत हुई. मौत के बाद डाक्टरों ने उन्हें संदिग्ध की श्रेणी में रख दिया, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद राहत की सांस ली. दरअसल यह स्थिति अब आम हो गई है. सर्दी, जुकाम और श्वसन की बीमारी से जुड़े किसी भी मरीज की मृत्यु पर उसे संदिग्ध ही माना जा रहा है. इससे मेयो और मेडिकल में कार्यरत डाक्टरों सहित नर्स व अन्य स्टाफ का टेंशन भी बढ़ने लगा है.