मराठा आरक्षण: बीजेपी के 'संकटमोचन' बन कुर्सी संभालेंगे पाटील!
मुंबई, महाराष्ट्र की राजनीति में दिख रहे उतार-चढ़ावों के बीच एक चेहरा ऐसा भी है, जो पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को मजबूत चुनौती दे रहा है। सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार और राज्य के एडमिनिस्ट्रेशन पर नियंत्रण खोने के आरोपों के बीच मराठा आंदोलन ने जहां फडणवीस सरकार को कमजोर किया है, वहीं मराठा समुदाय से आने वाले बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटील ने खुद को सरकार में सत्ता के एक समानांतर केन्द्र के रूप में स्थापित कर लिया है। हालांकि बीजेपी के राज्य नेतृत्व सहित केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार के नेतृत्व में बदलाव की किसी भी बात को खारिज कर दिया है, लेकिन पार्टी के सूत्रों के मुताबिक फडणवीस को पद छोड़ने के लिए कहा जा रहा है और राजस्व मंत्री पाटील उनकी जगह ले सकते हैं। इन अटकलों को और ज्यादा बल तब मिला जब शिवसेना सांसद संजय राउत ने हाल ही में दावा किया कि बीजेपी में फडणवीस की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाने की बातें चल रही हैं। इसके अलावा इस बदलाव के संकेतों की चर्चा और ज्यादा तब होने लगी जब मराठा कोटा पर बनाई गई कैबिनेट सबकमिटी के चेयरमैन ने गुरुवार को बैठक की। शुक्रवार को भी उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रतिनिधिमंडल से इस बात का निरीक्षण करने को कहा है मराठा आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं या नहीं। सूत्रों की मानें तो कई मराठा संगठनों ने फडणवीस की जगह पाटील से बातचीत को प्रथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि मराठा समुदाय के इस रुख के मुख्य कारणों में से एक पांडारपू में वार्षिक तीर्थयात्रा में बाधा डालने वालों में कुछ मराठा संगठनों की संभावना के बारे में मुख्यमंत्री का बयान था। एक सीनियर बीजेपी विधायक ने कहा, 'कई विधायक और नेता चंद्रकात दादा के प्रति वफादार हैं। उनके पास अपने फॉलोअर्स हैं। वह एक मराठा नेता हैं, उन्हें इसका फायदा मिलता है।' एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, '2014 में फडणवीस ने मुख्यमंत्री उम्मीदवारों जैसे एकनाथ खड़से, पंकजा मुंडे, सुधीर मुंगांतिवार और विनोद तावड़े को पीछे छोड़ दिया था। तब पाटील सीएम पद के दावेदार नहीं थे, लेकिन अब वह एक चुनौती बनकर उभरे हैं। उनकी एकमात्र कमी यह है कि पाटील का कोई जनाधार नहीं है और वह वोट-पुलर नहीं हैं।' बीजेपी से कुछ नेताओं ने यह भी बताया कि इससे पहले जब फड़नवीस की जगह पर किसी और को लाने की बात हुई तो पाटील का ही नाम सबसे आगे था। बीजेपी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा, 'पाटील को हम एक संकटमोचक के रूप में देख रहे हैं, जो मराठा आरक्षण आंदोलन को दबा सकते हैं और इस मुद्दे पर फडणवीस फेल हुए हैं।' हम मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हैं और साथ ही मांग करते हैं कि वो माफी मागें : सकल मराठा समाज डीएमके प्रमुख एम.करुणानिधी की तबीयत बीते कुछ दिनों से खराब चल रही है . प्राथमिक उपचार के बाद भी सेहत में सुधार न होने की वजह से ही उन्हें चेन्नई में शिफ्ट किया गया है. वहीं, अफ्रीका के तीन देशों के दौरे पर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस लौट आए हैं. उधऱ, पाकिस्तान आम चुुनाव में दोबारा चुनाव कराने की मांग उठने लगी है. इधर, महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. वहीं, शुक्रवार की रात में चंद्रग्रहण दिखा है. साथ ही, देश-दुनिया की राजनीति, खेल एवं मनोरंजन जगत से जुड़े समाचार इसी एक पेज पर जानें... हम मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हैं और साथ ही मांग करते हैं कि वो माफी मागें. हम मृतकों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग करते हैं और उन पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं जिन्होंने महिलाओं पर लाठी चार्ज किया. अगर ये मांगें नहीं मानी गईं तो एक अगस्त से हम जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे : सकल मराठा समाज.हमें सरकार पर भरोसा नहीं. उन्होंने कोई निर्णय लेना चाहिए, हम उनसे आगे कोई बातचीत नहीं करना चाहते : सर्वदलीय बैठक पर सकल मराठा समाज ने कहा. महाराष्ट्र सरकार में रायगढ़ बस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की. अमेरिका में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में उपनगरीय कॉर्पस क्रिस्टी में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओें में पांच लोगों की मौत हो गई. उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में 26-28 जुलाई के बीच भारी बारिश और बिजली गिरने से 58 लोगों ने गंवाई जान. सबसे ज्यादा सहारनपुर में 11 लोगों की मौत. 53 अन्य लोग घायल भी हुए हैं. यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और इसके बढ़ने के आसार हैं. पूर्वी जिले के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट अरुण गुप्ता ने बताया, 'हम एहतियात के तौर पर प्रभावित होने वाले इलाकों से लोगों को हटा रहे हैं.' पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, 'महाराष्ट्र के रायगढ़ में हुई बस दुर्घटना को लेकर बहुत दुखी हूं. मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है.' बिहार: 2012 के जहरीली शराब के मामले में आरा कोर्ट ने 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके अलावा कोर्ट ने 1 आरोपी को 2 साल की कैद की सजा सुनाई. बता दें कि 2012 में बिहार के आरा जिले में जहरीली शराब के सेवन से 21 लोगों की मौत हुई थी.
