एम्स में तीसरे दिन भी डॉक्टरों की हड़ताल जारी
नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल 2019 के विरोध में डॉक्टरों का प्रदर्शन लगातार जारी है. दिल्ली के एम्स में तीसरे दिन भी डॉक्टरों की हड़ताल जारी है. डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है कि डॉक्टरों के लगातार प्रदर्शन के बाद भी गुरुवार को राज्यसभा में एनएमसी बिल पास करा दिया गया. इससे पहले 29 जुलाई को लोकसभा में ये बिल पास किया गया था. इस बिल के विरोध में पूरे देश में डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है.
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं, जिसका असर सीधे तौर पर मरीजों पर पड़ रहा है. अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं. बताया जाता है कि गुरुवार को एक लाख से अधिक मरीजों को इलाज नहीं मिला, वहीं ढाई हजार से ज्यादा सर्जरी टालनी पड़ी. आईएमए ने एमएमसी विधेयक की धारा 32 को लेकर चिंता जताई है, जिसमें 3.5 गैर चिकित्सकीय लोगों या सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं को लाइसेंस देने की बात की गई है.
इसके अलावा चिकित्सा छात्रों ने प्रस्तावित ‘नेक्स्ट’ परीक्षा का उसके मौजूदा प्रारूप में विरोध किया है. विधेयक की धारा 15(1) में छात्रों के प्रैक्टिस करने से पहले और स्नातकोत्तर चिकित्सकीय पाठ्यक्रमों में दाखिले आदि के लिए ‘नेक्स्ट’ की परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रस्ताव रखा है. एम्स, आरएमएल और शहर के अन्य अस्पतालों की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने हड़ताल के संबंध में संबंधित प्रशासनों को बुधवार को नोटिस दिया था.
क्या है नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल 2019
भारत में अभी तक मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की देखरेख में होता है. बिल पास हो जाने के बाद एमबीबीएस पास करने वाले मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिस के लिए एग्जिट टेस्ट देना जरूरी होगा. अभी एग्जिट टेस्ट सिर्फ विदेश से मेडिकल पढ़कर आने वाले छात्रों को ही देना होता है. यही नहीं एनएमसी बिल के सेक्शन 32 में 3.5 लाख नॉन मेडिकल शख्स को लाइसेंस देकर सभी प्रकार की दवाइयां लिखने और इलाज करने का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है, जिसका डॉक्टर विरोध कर रहे हैं.
