प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन आज भारत की प्रथम महिला शिक्षिका का गौरव प्राप्त सावित्रीबाई फुले जी को कौन नहीं जानता । आज से लगभग 165 साल पहले 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की और अपने पति ज्योतिराव जी के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की 9 छात्राओं के साथ एक विद्यालय बनाया और एक साल के अंदर ही पांच अलग-अलग स्थानों पर विद्यालयों की भी शुरुआत की । जरा सोच कर देखें कि रूढ़िवादी इस देश में जहां पर कन्या शिक्षा प्रतिबंधित थी, उस समय एक विद्यालय की स्थापना कर उसका संचालन करना कितना कठिन मुश्किल एवं चेतावनी पूर्ण कार्य होगा । तत्कालीन समय सावित्रीबाई फुले ने सिर्फ खुद ही शिक्षित हुई बल्कि दूसरों को भी शिक्षित किया ।
20 वर्ष की आयु में भारत का पहला कन्या विद्यालय और किसान स्कूल की स्थापना करने वाली सावित्रीबाई फुले को पति ज्योतिराव जी का संपूर्ण समर्थन एवं संरक्षण प्राप्त था ज्योति राव जी महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार और आंदोलनकता थे । वे महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए भी जाने जाता है । वे सावित्री बाई के गुरु थे सावित्रीबाई ने अपने जीवन को मिशन की तरह जिया , विधवा विवाह कराना छुआछूत मिटाना तथा महिलाओं को शिक्षित करना ही उनका उद्देश्य था ।
मराठी भाषा की आदिकवित्री के रूप में जानीमानी सावित्री बाई जी का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था । इनके पिता का नाम खंदोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था । और उनका ज्योतिबा फुले जी से 1840 में विवाह हुआ था । सावित्रीबाई जब कन्याओं को पढ़ाने के लिए स्कूल जाती थी, तो रास्ते पर लोगों के द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग के साथ साथ, गंदगी कीचड़ गोबर आदि फेंका जाता था जिससे उनके कपड़े गंदे हो जाते थे परंतु इसका विकल्प उनके पास था । वह अपने थैले में अतिरिक्त साड़ी लेकर जाती थी और स्कूल पहुंचकर साड़ी बदल लेती थी । उनके अंदर किसी भी कार्य को करने व सफल बनाने की धुन सवार थी । जिसमें वह सफल भी हुई 66 वर्ष की आयु में मार्च 1897 में प्लेग रोगियों की सेवा करते हुए उन्हें भी प्ले हो गया और उनकी मृत्यु हो गई । उनकी मेहनत आज हमें हमारे स्कूल में पढ़ाती हुई शिक्षिकाओं को देखकर सफल होती दिखाई देती है । महिला शिक्षा के क्षेत्र मे उनका यह योगदान हम सभी के लिए वरदान साबित हो रहा है । सावित्रीबाई जैसी महान आतम के प्रयासो से ही हमारी शिक्षा वयवस्था सक्षम और सफल हुई है ।
आलेख डॉ. नेहा नेमा मप्र
