कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक दिग्विजय सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू, ‘मैं बाेलता हूं, तो वोट कट जाते हैं’

नई दिल्ली, मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक दिग्विजय सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। दरअसल विडियो में वह खुद अपनी बेचारगी की बात स्वीकार कर रहे हैं। दिग्विजय दो दिन पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के घर पहुंचे थे। वहीं पर वह कहते सुने गए कि 'मेरा काम सिर्फ एक है - कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं। मेरे भाषण देने से तो कांग्रेस के वोट कटते हैं इसलिए मैं कहीं जाता ही नहीं।' 

उनका यह विडियो आने के बाद मुख्य विरोधी पार्टी बीजेपी को चुटकी लेने का मौका मिल गया। हालांकि यह जानना अहम है कि वह शख्स जिसे कभी कांग्रेस का चाणक्य या राहुल गांधी का राजनीतिक गुरु कहा जाता था, वह आज इतना असहाय महसूस क्यों कर रहा है कि खुद के भाषण देने से कांग्रेस के वोट कटने की बात तक कह रहा है। मध्य प्रदेश में भी पार्टी का जो प्रचार अभियान चल रहा है, उसमें राहुल गांधी के साथ कमलनाथ और सिंधिया ही दिख रहे हैं। 

कहा जाता है कि गोवा में कांग्रेस के सरकार न बना पाने के लिए राहुल गांधी दिग्विजय सिंह को ही जिम्मेदार मानते हैं। राहुल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि दिग्विजय जैसे वरिष्ठ नेता से इस हद तक लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। यहीं से दिग्विजय को लेकर राहुल के मन में विश्वास कम होने लगा। उनसे एक-एक कर पहले गोवा, कर्नाटक और तेलंगाना का प्रभार वापस लिया गया, फिर राहुल के नेतृत्व वाली कांग्रेस वर्किंग कमिटी में भी उन्हें जगह नहीं दी गई। दूसरी बात यह भी कि दिग्विजय के बड़बोलेपन को लेकर भी कांग्रेस सशंकित रहती है। मायावती को लेकर उनकी बयानबाजी भी उनके खिलाफ ही गई। मायावती ने उनके बयान पर जिस तरह की प्रतिक्रिया दी, उससे कांग्रेस को काफी असहजता का सामना करना पड़ा। पार्टी के भीतर दिग्विजय के उस बयान को अच्छे रूप में नहीं लिया गया। कहा गया कि दिग्विजय ने मायावती को लेकर जो कुछ भी कहा, अगर वह सच भी था तो भी उन्हें मायावती को लेकर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करनी चाहिए थी। इस मुद्दे पर एक चर्चा यह भी उभरी कि उन्होंने मध्य प्रदेश में पार्टी के भीतर अपने विरोधियों का 'खेल बिगाड़ने' की गरज से मायावती पर निशाना साधा। इसी प्रकरण के बाद उन्हें राहुल की तरफ से यह संदेशा भेजा गया कि फिलहाल वह खामोश रहें क्योंकि छोटी सी चूक की पार्टी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके बाद ही दिग्वजिय किनारे हो गए। 

दिग्विजय का हाशिए पर जाना मध्य प्रदेश में कांग्रेस पर क्या असर डाल सकता है/ कई नेता तो यहां तक कहते हैं कि नुकसान के बजाय फायदा ही होगा। इस विचार के नेताओं का तर्क है कि उनके लगातार दस साल के शासन का असर है कि कांग्रेस पिछले 15 सालों से सत्ता में वापसी नहीं कर पा रही है लेकिन मध्य प्रदेश की राजनीति को बहुत नजदीक से समझने वाले मानते हैं कि दिग्विजय जैसे धुरंधर राजनीतिज्ञ इतनी आसानी से खुद को राज्य की राजनीति से किनारे नहीं होने देंगे।