बाबू भाई भवानजी ने किया कांग्रेस के आरोपों का ख़ंडन
मुंबई के पूर्व उपमहापौर और मुंबई भाजपा हॉकर्स यूनिट के अध्यक्ष बाबू भाई भवानजी ने एक बयान में कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि एनडीए सरकार द्वारा अटल जी के अनुरोध पर भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मोस मिसाइल तैयार की थी जिसका काट आज तक दुनिया का कोई देश तैयार नहीं कर सका है. विश्व के पास अब तक ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं जो ब्रह्मोस को अपने निशाने पर पहुंचने से पहले रडार पर ले सके. अपने आप में अद्भुत क्षमता को लिए ब्रह्मोस ऐसी परमाणु मिसाइल है जो 8000 किलोमीटर के लक्ष्य को मात्र 140 सेकंड में भेद सकती है. न चीन आज तक ब्रह्माेस की काट बना सका है ना ऐसा रडार सिस्टम जो ब्रह्मोस को पकड़ सके. अटल जी की सरकार गिरने के बाद सोनिया के कहने पर कांग्रेस सरकार ने ब्रह्मोस को तहखाने में रखवा कर आगे का प्रोजेक्ट बंद करवा दिया, जिसमें ब्रह्मोस को लेकर उड़ने वाले फाइटर जेट विमान तैयार करने की योजना थी जो अधूरी रह गई. 10 वर्षों बाद जब से मोदी सरकार आई तब तहखाने में धूल गर्द में पड़ी ब्रह्मोस को संभाला गया. वह भी तब जब मोदी खुद भारतीय सेना से सीधा मिले. तब सेना ने व्यथा बताई. भवानजी ने आगे बताया कि वर्तमान में ब्रह्मोस को लेकर उड़ सके ऐसा सिर्फ एक ही विमान है और वह है राफेल, जो ब्रह्मोस को सफलतापूर्वक निशाने के लिए छोड़ कर वापस लैंड करके मात्र 4 मिनट में फिर दूसरे फ्लाइट के लिए तैयार हो जाए. श्री मोदी ने फ्रांस से डील करके राफेल को भारतीय सेना तक पहुंचाने का काम कर दिया, जिससे चीन और उसके पिट्ठू वामपंथियों को परेशानी हुई. इसमें देशद्रोही पीछे कैसे रहते, जो विदेशी टुकड़ों पर पल़ने वाले गद्दार अपने आका चीन के नमक का हक अदा करने मैदान में उतर आए. खैर शायद भारतीय सेनाऔर मोदी दोनों इस तरह की आशंका को भांप गए तो राफेल केे भारत पहुंचते ही उसका ब्लैक बॉक्स सहित पूरा सिस्टम निकाला गया. राफेल के कोड चेंज करके उसमें भारतीय कंप्यूटर सिस्टम डाला गया जो राफेल को पूरी तरह बदलने के साथ उसकी गोपनीयता बनाए रखने में सक्षम था. लेकिन बात यहीं नहीं रुकी राफेल को सेना के सुपुर्द करने के बाद सरकार ने सेना को अपने हिसाब से कंप्यूटर ब्लैक बॉक्स और जो तकनीक सेना की है उसे अपने हिसाब से चेंज करने की छूट दे दी. सेना को छूट मिलते ही मात्र 48 घंटों में राफेल को बदल कर रख दिया और चीन जो राफेल के कोड और सिस्टम को हैक करने की फिराक में था. वह हाथ मलते रह गया और तब चीन ने अपने पाले वामपंथी को राफेल की जानकारी लिक करके उस तक पहुंचाने का काम सौंपा गया .
भारत भर की मीडिया में भरे वामपंथी दलालों ने राफेल सौदे को घोटाले की शक्ल देने की नाकाम कोशिश की, ताकि सरकार या सेना विवश होकर सफाई देने के चक्कर में इस डिल को सार्वजनिक करें जिससे चीन अपने मतलब की जानकारी जुटा सके. पर सरकार और सेना की सत्यता के चलते दलाल मीडिया का मुंह काला होकर रह गया. तब राहुल गांधी ने चीन की यात्रा की और आते ही राफेल सौदे पर सवाल उठा कर राफेल की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग जोर-शोर में उठने लगी. पूरा मीडिया सारी कांग्रेस की दिलचस्पी सिर्फ और सिर्फ राफेल की जानकारी सार्वजनिक कराने में है, ताकि चीन ब्रह्मोस का तोड़ बना सके लेकिन यह अब तक संभव नहीं हो पाय.
भवान जी ने आगे कहा कि जिसका श्रेय सिर्फ कर्तव्यनिष्ठ भारतीय सेना और श्री मोदी जी को जाता है. चीन ब्रह्मोस की जानकारी जुटाने के चक्कर में सीमा पर तनाव पैदा करके युद्ध के हालात बना कर देख चुका है. पर भारतीय सेना की चीन सीमा पर ब्रह्मोस की तैनाती देखकर अपने पांव वापस खींचने को मजबूर होना पड़ा. डोकलाम विवाद चीन ने इसलिए पैदा किया था. ताकि वह ब्रह्मोस और राफेल की तैयारी देख सके. आज राफेल और ब्रह्मोस भारत के पास वह अस्त्र है, जिसके आगे वो बेवस है.इसकी सारी क्रेडिट प्रधानमंत्री को जाती है.
