आरएमएसआई की रिपोर्ट में खुलासा, २०३० तक तटीय इलाका छोटा हो जाएगा
मुंबई, साल २०३० तक मुंबई, कोच्चि, मैंगलोर, चेन्नई, विशाखापट्टनम और तिरुवनंतपुरम का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। समुद्र का पानी जमीन को निगलेगा। इतना ही नहीं, कुछ लोगों को अपने घरों और व्यवसायों को छोड़कर पलायन करना पड़ सकता है। साल २०५० तक तो इन शहरों की हालत और खराब हो जाएगी। मुंबई की कम-से-कम १,००० इमारतों पर बढ़ते समुद्री जलस्तर का असर पड़ेगा। कम-से-कम २५ किलोमीटर लंबी सड़क खराब हो जाएगी। जब हाई टाइड आएगा तब २,४९० इमारतें और १२६ किलोमीटर लंबी सड़क पानी में होगी। ये जानकारी आरएमएसआई की स्टडी में सामने आई है।
आरएमएसआई ने इस साल जुलाई में एक स्टडी की थी, जिसमें कहा था कि हाजी अली दरगाह, जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे, बांद्रा-वर्ली सी लिंक, मरीन ड्राइव पर क्वीन नेकलेस ये सब डूबने की कगार पर पहुंच जाएंगे। आरएमएसआई ने यह विश्लेषण आईपीसीसी के छठें क्लाइमेट एसेसमेंट रिपोर्ट से किया है। ऐसी हालत सिर्फ मुंबई की नहीं होगी। बढ़ते समुद्री जलस्तर की मार कोच्चि, मैंगलोर, चेन्नई, विशाखापट्टनम और तिरुवनंतपुरम को भी बर्दाश्त करना होगा। आईपीसीसी ने जो चेतावनी दी है, वो तो अलग है। पृथ्वी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी हिंद महासागर १८७४-२००४ के बीच हर साल १.०६ से १.७५ मिलीमीटर की गति से बढ़ रहा था, लेकिन यह १९९३ से २०१७ के बीच ३.३ मिलीमीटर प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है अगर आप १८७४ से लेकर २००५ तक देखिए तो हिंद महासागर करीब एक फीट ऊपर आ चुका है।
