सरकार की तानाशाही के खिलाफ शिवसेना की हाईकोर्ट में चुनौती!
मुंबई, विपक्षी दलों की आवाज को दबाने के लिए राज्य सरकार पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। इस तरह का दावा करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी) के नेताओं ने मुंबई हाई कोर्ट में एक आपराधिक रिट याचिका दायर की है। शिवसेना ने पिछले महीने नई मुंबई में मिंधे सरकार के खिलाफ भव्य मोर्चा निकाला था। उस आंदोलन का नेतृत्व करनेवाले शिवसेना नेताओं के खिलाफ एक ही साथ दो पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। सरकार के दबाव में दर्ज की गई एफआईआर को रद्द किया जाए। इस तरह की मांग याचिका के माध्यम से की गई है। इस याचिका के कारण मिंधे सरकार के मुसीबत में आने की संभावना है।
शिवसेना विधान परिषद के विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे, सांसद अरविंद सावंत और विधायक भास्कर जाधव इन शिवसेना नेताओं की तरफ से एड. शुभम काहिटे ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है। सितंबर महीने में शिवसेना के पूर्व नगरसेवक मनोहर मढवी और कल्याण जिलाप्रमुख विजय साल्वी के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई थी। शिंदे गुट में शामिल नहीं होने वाले शिवसेना के नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ आदेश लेकर उन्हें प्रताड़ित किया गया। साथ ही राजनीतिक बदले की भावना से शिवसैनिकों पर मुकदमे दर्ज किए गए। इस ओर ध्यान दिलाने के लिए शिवसेना ने पिछले महीने नई मुंबई पुलिस आयुक्तालय पर भव्य मोर्चा निकाला था। उस मोर्चे को लेकर शिवसेना नेताओं के खिलाफ सीबीडी-बेलापुर पुलिस स्टेशन और एनआरआई सागरी पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गर्इं थीं। एक ही घटना की दो पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होना सत्ताधारियों द्वारा पुलिस तंत्र पर राजनीतिक दबाव को दर्शाता है। रिट याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण काम कर रही है। याचिका पर जल्द ही दो सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई होने की संभावना है और इससे मिंधे सरकार की समस्याओं में और बढ़ोतरी होने की संभावनाएं हैं।
