जलजमाववाले क्षेत्रों से मुंबईकरों को मुक्ति दिलाने के लिए जोरदार युक्ति

मुंबई. मानसून के दौरान होनेवाले जलजमाव से मुंबई के लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, सड़कों पर जलजमाव से प्रत्येक वर्ष कई लोग हादसे का शिकार तक हो जाते हैं। लिहाजा मनपा ने जलजमाववाले क्षेत्रों से मुंबईकरों को मुक्ति दिलाने के लिए जोरदार युक्ति खोज निकाली है। इसके तहत मनपा ने बारिश में जलजमाव के स्तर को नापने के लिए १०० पुराने स्थानों में सेंसर और ऑटोमेटिक रेन गेज लगाना शुरू कर दिया है, ताकि जलजमाव होते ही अलर्ट मिल जाए।
उल्लेखनीय है कि मुंबई में जलजमाव की सीमा का आकलन करने के लिए वर्तमान में कोई व्यवस्था नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई में ३८६ जलजमाव स्थल हैं, जिसमें से मनपा ने २८० स्थानों की समस्याओं का निराकरण कर दिया है। मनपा अधिकारियों के अनुसार शेष जलजमाववाले क्षेत्रों से निपटने के लिए काम किया जा रहा है। बताया गया है कि ऑटोमेटिक रेन गेज दर्ज वर्षा की मात्रा की गणना करेगा। इसके साथ ही उस बिंदु को निर्धारित करने में मदद करेगा, जहां से इन स्थानों पर जलजमाव शुरू होता है। मुंबई में अर्बन हीट आइसलैंड की मैपिंग के लिए एआरजी में तापमान सेंसर भी होंगे।
स्थानीय डेटा एकत्र करने में करेगी मदद
मनपा के स्टॉर्म वाटर ड्रेन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को नियुक्त कर समन्वय में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। यह परियोजना मनपा को स्थानीय डेटा एकत्र करने में मदद करेगी। इसमें क्षेत्र में जलजमाव का स्तर, पानी के घटने में लगने वाला समय, उस विशेष क्षेत्र में समय के साथ वर्षा की मात्रा को मापना आदि शामिल है। इस जानकारी के आधार पर वर्षा के जल निकासी व्यवस्था में सुधार और अन्य उपाय किए जा सकेंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार एआरजी को प्रत्येक दो वर्ग किमी पर एक मशीन स्थापित किया जाना चाहिए। मुंबई में इस समय प्रत्येक चार वर्ग किमी पर केवल एक मशीन है।