कैंसर रोगियों के जीवन को आसान बनानेवाली इस नई तकनीक, केईएम अस्पताल की तरफ से प्रयास शुरू

मुंबई, कैंसर को लेकर अभी भी लोगों में खौफ का माहौल है। अमूमन कैंसर रोगियों को अक्सर इलाज के दौरान प्रभावित अंग को निकालना पड़ता है, इससे उन्हें भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। हालांकि जल्द ही कैंसर रोगियों का यह डर दूर हो जाएगा। कारण केवल कैंसर कोशिकाओं को हटाने की तकनीक आ गई है। कैंसर रोगियों के जीवन को आसान बनानेवाली इस नई तकनीक के लिए केईएम अस्पताल की तरफ से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसके तहत मनपा प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर मुहर लगते ही वैंâसर मरीजों में जीने की आस जागनी शुरू हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि निजी अस्पतालों में आनेवाले मरीजों को अक्सर पहले चरण के कैंसर का पता चलता है। हालांकि मनपा अस्पताल में आनेवाले मरीजों में कैंसर कुछ हद तक गंभीर अवस्था में पहुंचा हुआ होता है इसलिए मजबूरन डॉक्टरों को रोगी के प्रभावित अंग को निकालना पड़ता है। कैंसर का निदान होने के बाद से भयभीत हुए मरीजों को और अधिक मानसिक निराशा का सामना करना पड़ता है।
केईएम अस्पताल को एक कंपनी ने प्रायोगिक आधार पर यह उपकरण दिया था। इस तकनीक से अब तक ४-५ मरीजों का इलाज किया जा चुका है। खास बात यह है कि कैंसर के इन रोगियों का स्वास्थ्य अच्छा है। कैंसर विभाग की प्रमुख डॉ. शिल्पा राव के मुताबिक मरीजों में अभी तक कोई दुष्प्रभाव नहीं हुआ है। ३३ वर्षीय एक गृहिणी का हाल ही में स्तन कैंसर का इलाज इसी तकनीक से किया गया था। स्तन में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को हटा दिया गया। उन्हें दो महीने पहले इस बीमारी का पता चला था।
इंडो साइनाइन ग्रीन डाई उपचार तकनीक में इंडो सायनो मेन ग्रीन नामक दवा का इंजेक्शन दिया जाता है। ये इंजेक्शन किसी अंग में दिए जाने पर प्रभावित क्षेत्र का रंग बदल जाता है इसलिए यह ठीक-ठीक पता चल जाता है कि वैंâसर किस क्षेत्र में फैला है। नतीजतन, उतने ही क्षेत्र में फैली कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इसके चलते अंग क्षतिग्रस्त नहीं होता और उसे बचा लिया जाता है।
केईएम अस्पताल में आनेवाले कई मरीजों में कैंसर खतरनाक अवस्था में होता है। ऐसी स्थिति में प्रभावित हिस्से अथवा अंग को हटाना पड़ता है। हालांकि नई तकनीक से इससे आसानी से बचना संभव होगा। संबंधित उपकरण की कीमत करीब ९५ लाख रुपए है। यदि इस प्रस्ताव को मनपा से मंजूरी मिल जाती है तो यह तकनीक मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।