मेट्रो-३ के खिलाफ ‘काम रोको’ आंदोलन
मुंबई, गिरगांव-कालबादेवी में मेट्रो-३ परियोजना का काम शुरू हुए सात साल हो चुके हैं, लेकिन परियोजना पीड़ितों का पुनर्वास अभी तक नहीं हुआ है। क्षेत्र के निवासियों, व्यापारियों और मछुआरे पुनर्वास से वंचित हैं। उन्हें गिरगांव में घर और दुकान मिलना ही चाहिए। इस मांग को लेकर कल शिवसेना और गिरगांव-कालबादेवी रहिवासी कृति समिति की ओर से ‘मेट्रो काम बंद’ आंदोलन किया गया। शिवसेना ने मेट्रो प्रशासन को चेतावनी दी है कि योजना प्रभावितों का पुनर्वसन जल्द किया जाए वरना शिवसेना भूख हड़ताल करेगी।
शिवसेना ने चेतावनी दी है कि प्रभावितों के मसले का तत्काल समाधान निकाला जाए अन्यथा मेट्रो कार्यस्थल पर रहिवासियों के साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे। शिवसेना व गिरगांव-कालबादेवी रहिवासी कृति समिति की ओर से विभागप्रमुख पांडुरंग सकपाल के नेतृत्व में आक्रोश मोर्चा निकाला गया। इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों नागरिक, व्यवसायी, मछुआरे शामिल थे। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिवसैनिक भी शामिल थे। शिवसेना के उपनेता रवींद्र मिर्लेकर, उपनेता मीना कांबली, आशा मामेडी, विभागप्रमुख पांडुरंग सकपाल, विभाग संयोजक युगंधरा सालेकर, शाखाप्रमुख नीलेश अहिरेकर, अभिजीत गुरव, विनोद लोटलीकर, शिवाजी राहणे, संपत ठाकुर, तेजस सकपाल और बड़ी संख्या में शिवसैनिक मौजूद थे।
परियोजना प्रभावितों की प्रमुख मांगों में निवासियों की पात्रता के संबंध में उत्तराधिकारियों के अधिकार को प्रमाणित करने के नियमों में ढील दी जाए। निवासियों को अंतिम अनुबंध, आवंटन पत्र, कन्वेंस डीड तत्काल दी जाए। वाणिज्यिक और आवासीय गालों का संशोधित नक्शा तुरंत प्रस्तुत किया जाए। पुनर्वास की अंतिम तिथि घोषित की जाए। निवासियों के पात्रता के संबंध में जारी नोटिस निरस्त की जाए। मेट्रो कार्य के चलते कई पुरानी इमारतों में दरारें आ गई हैं। एमएमआरसीएल को उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी ली जाए आदि मांगें शामिल हैं।
