मुंबई की पुलिस कमिश्नर बन सकती हैं विवादित IPS रश्मि शुक्ला!
मुंबई: विवेक फणसलकर को मुंबई पुलिस कमिश्नर बने अभी सिर्फ तीन महीने हुए हैं, साथ ही रजनीश सेठ को भी महाराष्ट्र डीजीपी की पोस्ट फरवरी में ही मिली। दोनों के रिटायरमेंट को अभी दो साल बाकी हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से अटकलें चल रहीं हैं कि रश्मि शुक्ला को डीजीपी या मुंबई सीपी में से किसी एक पोस्ट पर लाया जा सकता है। इन अटकलों को हवा तब मिली, जब रश्मि शुक्ला ने एक पखवाड़े के अंदर पहले उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुंबई में मुलाकात की। इसके बाद वह गुरुवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलीं। शुक्ला महाराष्ट्र कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। इन दिनों प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में हैं। वहां उनका कार्यकाल यों तो साल 2024 तक है, लेकिन केंद्र और महाराष्ट्र सरकार चाहे, तो उन्हें वापस महाराष्ट्र कैडर में भेज सकती है। महाराष्ट्र में डीजी रैंक की आठ पोस्ट हैं।
खास बात यह है कि शुक्ला इस वक्त डीजी रैंक के सभी अधिकारियों से सीनियर हैं-मुंबई पुलिस कमिश्नर विवेक फणसलकर से भी वरिष्ठ हैं और डीजीपी रजनीश सेठ से भी। जब तक लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं होता, अमूमन सीपी या डीजीपी को उनके प्रमोशन या रिटायरमेंट तक हटाया नहीं जाता। लेकिन हेमंत नगराले का उदाहरण सभी ने हाल में ही देखा है। उनका रिटायरमेंट सितंबर में ड्यू था, लेकिन उन्हें फरवरी में हटाकर संजय पांडेय को मुंबई सीपी बनाया गया था। संजय पांडेय 30 जून को रिटायर हुए। उसके अगले दिन सीबीआई ने फोन टैपिंग केस में एफआईआर दर्ज की और उसके एक सप्ताह बाद ईडी ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। शनिवार 24 सितंबर को सीबीआई ने भी उनकी कस्टडी ली।
रश्मि शुक्ला भी फोन टैपिंग से जुड़े विवादों के कारण पिछले एक साल से सुर्खियों में रहीं। हालांकि पांडेय और शुक्ला के टैपिंग के मामले अलग-अलग हैं। पांडेय पर नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर यहां के कर्मचारियों के अवैध फोन टैप करने का आरोप था, जबकि शुक्ला पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं के फोन टैप करने का आरोप लगा। इसी आरोप में उन पर पहले पुणे में और फिर कोलाबा पुलिस में पिछली महाविकास आघाडी सरकार के कार्यकाल में एफआईआर दर्ज हुई थी। एक एफआईआर बीकेसी में भी दर्ज हुई थी। लेकिन उसमें रश्मि शुक्ला का नाम नहीं था।
शुक्ला से जुड़े एक केस में मुंबई पुलिस ने देवेंद्र फडणवीस से भी उनके घर जाकर पूछताछ की थी। कोलाबा केस में रश्मि शुक्ला पर चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई थी, लेकिन चूंकि वह आईपीएस हैं, केंद्र सरकार के अधीन हैं, इसलिए पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार से परमिशन मांगी है। चूंकि महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार का मानना है कि रश्मि शुक्ला पर पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से गलत एफआईआर दर्ज की, उन्हें जानबूझकर परेशान और अपमानित किया, इसलिए संभावना इसी बात की है कि केंद्र सरकार शायद ही शुक्ला के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी दे।
रश्मि शुक्ला यूपी से ताल्लुक रखती हैं। प्रयागराज से उनका लंबा जुड़ाव रहा है। वहां से ही उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 24 साल की उम्र में 1988 में वह आईपीएस बन गई थीं। उनकी उदय शुक्ला से शादी हुई थी, जो मुंबई में आरपीएफ में वरिष्ठ पद पर थे। कुछ साल पहले उनके पति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। अपने पुलिस करियर में वह कई बड़े पदों पर रहीं। वह एसआईडी चीफ रहीं, वह पुणे की पुलिस कमिश्नर भी रहीं। एल्गार परिषद से जुड़ा, जो मामला इन दिनों एनआईए के पास है, उस केस में एफआईआर तब दर्ज हुई थी, जब वह पुणे की सीपी थीं।