अंगदान की भारी कमी : हर साल ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में मर जाते हैं पांच लाख लोग
मुंबई, विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार एक साल के भीतर कुछ ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाने और कम संख्या में अंगदान होने से हर साल अधिकांश लोगों की मृत्यु हो जाती है। जानकारी के अनुसार हर १० मिनट में एक नया नाम प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है। देश में प्रति लाख व्यक्तियों पर ०.८ फीसदी लोगों का ही अंगदान हो पा रहा है। अंगदान के महत्व के बारे में सीनियर कंसल्टेंट एक अंग दाता संभावित रूप से आठ लोगों की जान बचा सकता है। हर साल अंगों की प्रतीक्षा की उम्मीद लगाए बैठे पांच लाख लोग मर जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अंगदान के लिए पर्याप्त दाताओं का सामने न आना है। हेपेटोलॉजी और लीवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. उदय संगलोडकर ने कहा कि यह समझना अनिवार्य है कि एक स्वस्थ जीवित दाता द्वारा लीवर का कुछ हिस्सा डोनेट करने के बाद भी एक स्वस्थ जीवन जी सकता है। इतना ही नहीं लीवर ही ऐसा अंग है, जिसका कुछ हिस्सा दान करने के बाद समय बीतने के साथ वह फिर से सामान्य आकर में आ जाता है। जिन लोगों को लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, उनमें से ज्यादातर लोग मृतक डोनर के लीवर के इंतजार में कई महीने या साल बिता देते हैं। हालांकि अंतिम चरण के लीवर की बीमारी वाले रोगियों के लिए जीवित यकृत दान सबसे अच्छा विकल्प है।
अंगदान के बारे में जागरूकता के प्रति ग्लोबल अस्पताल ने गुरु नानक खालसा कॉलेज और एसआईईएस कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स के विद्यार्धियों को पाठ पढ़ाया। इस दौरान दोनों कॉलेजों के २०० से अधिक छात्रों ने अंगदान करने की शपथ ली।
