लॉकडाउन : राज्य की सीमाओं पर अटके हैं हजारों प्रवासी मजदूर

मुंबई : लॉकडाउन में मुंबई, ठाणे, नाशिक से पलायन करने वाले हज़ारों मजदूर अब भी महाराष्ट्र-एमपी की सीमा पर फंसे हुए हैं. मध्य प्रदेश होकर यूपी लौट रहे कामगारों को रोके जाने से बॉर्डर पर बवाल की स्थिति भी पैदा हो गई. मुंबई, उपनगरों में फंसे प्रवासी मजदूरों के पैदल पलायन से उपजी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एसटी बसों की व्यवस्था की. एसटी बसों से भी अब तक 2 लाख से ज्यादा प्रवासियों को राज्य की सीमा पर ले जाकर छोड़ा गया है. एकाएक इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के सीमा पर पहुंचने से हालात मुश्किल होने से उग्र श्रमिकों ने हंगामा किया.एमपी प्रशासन अपनी बसों से प्रवासी मजदूरों को ले जाने का काम कर रहा है, यूपी प्रशासन की तरफ से बसें लगाई गई हैं, परन्तु सीमा पर खाने-पीने की उचित व्यवस्था न होने से मजदूर परेशान हैं. 

ठाणे से किसी तरह रीवा तक पहुंचे अनुपकुमार ने बताया कि एसटी बस से एमपी सीमा तक आराम से पहुंचे, लेकिन रीवा पहुंचने में दो दिन इंतजार करना पड़ा. बसें कम भेजने पर कामगारों को भूखे प्यासे इंतजार करना पड़ा. झांसी के रक्सा और एमपी के दतिया, चिरुला और शिवपुरी बॉर्डर पर रोक दिया गया. पुलिस का कहना था कि निजी वाहन से किसी भी मजदूर को नहीं जाने दिया जाएगा.बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से अब भी जा रहे हैं.कई सड़क हादसों के बाद प्रशासन ने ट्रकों या अन्य वाहनों से जाने पर रोक लगाई है. भीषण गर्मी में कई जगह रोके जाने से मजदूरों का पारा और चढ़ रहा है.राज्य की सीमा पर 24 से 48 घंटे तक मजदूरों को बस का इंतजार करना पड़ रहा है,ऐसे में सीमा छावनी में तब्दील हो गई है.

शौचालय,पानी, दवाई आदि की समुचित व्यवस्था न होने से महिलाओं-बच्चों को ज्यादा परेशानी हो रही है. एमपी बॉर्डर पर जो मजदूरों रोके गए हैं, उनमें अधिकांश महाराष्ट्र के नासिक, मुंबई के हैं.गुजरात के अहमदाबाद और सूरत के अलावा राजस्थान के भी मजदूर शामिल हैं.जिन्हें यूपी के विभिन्न जिलों में जाना है. एमपी-यूपी सीमा पर मानिकपुर- रीवा चाकघाट पर हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर इकठ्ठा हो रहे हैं, जबकि उन्हें आगे ले जाने के लिए बसों की संख्या कम है. एमपी के एक अधिकारी के अनुसार प्रवासी मजदूरों को यूपी भेजने के लिए प्रयागराज, यमुनापार जिला प्रशासन से बात हुई, परन्तु 75 बसों की जगह मात्र 15 बसें भेजी गईं. प्रवासी मजदूरों की हालत ‘आसमान से गिरे, खजूर पर अटके’ वाली हो रही है.