भिवंडी : मजदूरों के पलायन का सिलसिला जारी
भिवंडी : लॉक डाउन से उपजे हालात से परेशान होकर भिवंडी से प्रवासी मजदूरों के पलायन का सिलसिला अनवरत जारी है. भिवंडी शहर से सुबह-शाम हजारों मजदूर परिजनों, दोस्तों के साथ पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर गांव निकल रहे हैं. सरकार द्वारा प्रवासी ट्रेनों को छोड़े जाने के बावजूद अधिसंख्य मजदूरों को ट्रेनों में जगह नहीं मिलने वजह से गरीब मजदूर निराश होकर पैदल ही मुलुक पलायन कर रहे हैं.
22 मार्च से 3 बार लॉक डाउन मियाद बढ़ने से गरीब मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है. रोजगार बंद होने से पैदा आर्थिक संकट की वजह से गरीब मजदूरों के समक्ष भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं. सामाजिक संस्थाओं सहित मनपा द्वारा मजदूरों को दिया जा रहा भोजन बेहद अपर्याप्त होने के कारण मजदूरों का पेट भी नहीं भर रहा है. पावरलूम मजदूर रामरती यादव, जब्बार अंसारी, अहमद खान, सुमेर लाल ने बताया कि, हम मेहनतकश लोग हैं. पसीना बहा कर हमेशा खाना खाते हैं. भीख मांग कर खाना अच्छा नहीं लगता लेकिन मजबूरी है जिंदा रहने के लिए खाना पड़ता है.
भिवंडी शहर में पावरलूम उद्योग से जुड़े करीब 3 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं. सरकार द्वारा विगत 1 सप्ताह में यूपी, बिहार, बंगाल, राजस्थान आदि शहरों के लिए प्रवासी ट्रेन भिवंडी, कल्याण, ठाणे, वसई, नासिक आदि स्टेशनों से चलाई जा रही है, जो श्रमिकों की संख्या के लिहाज से बेहद अपर्याप्त है. भिवंडी से करीब 2 लाख से अधिक श्रमिक मुलुक जाने की तैयारी में हैं. बावजूद श्रमिक ट्रेन में 1200 यात्रियों का जाना ऊंट के मुंह में जीरा समान है.
ट्रेन से मुलुक जाने वाले प्रवासी मजदूरों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सहित मेडिकल जांच कराना अनिवार्य है. गरीब मजदूर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन एवं मेडिकल जांच के लिए दर-दर भटकते देखे जा रहे हैं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद भी ट्रेन में जगह मिलना कठिन है. कठिन हालात में भी पुलिस एवं मेडिकल सर्टिफिकेट देने वालों को रिश्वत चुकाए बगैर गरीब मजदूरों के लिए मुलुक जाना टेढी खीर है.
भिवंडी शहर स्थित पावरलूम क्षेत्रों से हजारों मजदूर प्रतिदिन सिर पर बैग उठाए पत्नी, बच्चों, दोस्तों के साथ पैदल ही मुलुक पलायन कर रहे हैं.गरीब मजदूरों का जत्था शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक भिवंडी शहर से निकलता दिखाई पड़ता है. सूत्रों की मानें तो मजदूरों को मुलुक ले जाने हेतु ट्रक, टेंपो चालक करीब 2500 से 3000 रुपये ले रहे हैं. वाहन चालकों को जहां पुलिस पकड़ती है वहीं मजदूरों को छोड़कर वाहन चालक लौट आते हैं फिर गरीब मजदूरों के पास आगे पैदल जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है.
मजदूरों के हो रहे भारी पलायन से आगामी समय में लाक डाउन खुलने पर पावरलूम नगरी में रोजगार शुरू होना कठिन हो जाएगा.पावरलूम मालिकों को प्रवासी मजदूरों की मदद हेतु हाथ बढ़ाना चाहिए जिससे कम से कम पलायन हो सके अन्यथा लॉक डाउन खुलने के उपरांत भी भिवंडी पूर्णतया लॉक डाउन ही रहेगी.
