मुंबई: मुंबईकर तथा व्यापारी विरोधी निर्णय वापस ले सरकार - बाबू भाई भवानजी*
मुंबई। शराब की दुकानों के सामने होने वाली भीड को मुद्दा बनाकर मुंबई की सभी दुकानों को बंद कराने के मनपा के निर्णय को एक उंगली दुखने पर पूरा हाथ काटने सरीखा होने जैसा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने उक्त तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार मुंबईकरों की असुविधा तो बढा ही रही है, साथ ही छोटे व्यापारियों को भी मारने का काम कर रही है। उन्होंने मुंबईकरों तथा व्यापारी विरोधी निर्णय वापस लेने की मांग राज्य सरकार से की है। भवानजी ने कहा कि मुंबई में पिछले दो दिन शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दी थी। राजस्व बढाने के उद्देश्य से शराब की दुकानों को खोलने की जल्दबाजी राज्य सरकार ने की। इस बारे में उत्पाद शुल्क विभाग ने कोई नियोजन किया ही नहीं, जिसके स्वाभाविक रूप से शराब की दुकानों के सामने भीड जमा हो गई, जिसका तनाव पुलिस कर्मियों को झेलना पड़ा। साथ ही किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का पालन भी नहीं किया गया। लिहाजा हडबडी में लिए गए इस निर्णय से कदम वापस खींचने की नौबत आ गई। जिसके साथ ही मुंबई की सभी दुकानों को बंद करने का भी निर्णय लिया गया है।भवानजी ने कहा कि जीवनावश्यक वस्तुओं, सब्जी, दवा की जो दुकानें शुरू रहनी चाहिए थीं, उसे भी अनेक क्षेत्रों में पुलिस कर्मी बंद कराते देखे गए। इसके अलावा पंखे, गारमेंट्स जैसे दैनिक उपयोग वाली वस्तुओं की दुकानें भी शराब की दुकानों के साथ बंद करा दी गई हैं। जिससे मुंबईकरों की मुश्किलें एक बार फिर से बढ गई हैं। बाबूभाई भवानजी ने कहा कि लाकडाऊन के कारण छोटे तथा मझोले व्यापारी पहले से ही बर्बादी की कगार पर हैं, जिन्हें सहारा देने की जरूरत है, लेकिन इस बारे में कोई विचार न करते हुए राज्य सरकार ने आनन-फानन में निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शराब की दुकानों को शुरू करने में सरकार जल्दबाजी कर रही है, इस बारे में हमने पहले से ही चेताया था। लिहाजा शराब की दुकानों के बारे में जो भी निर्णय लेना हो, लें, लेकिन अन्य जीवनावश्यक वस्तुओं, दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं को उपलब्ध कराने वाली दुकानों को त्वरित प्रभाव से शुरू करने की मांग मुंबई मनपा के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने की है।
