पुणे : समर्पित भाव से काम करे प्रशासन

पुणे : केन्द्र सरकार ने कोरोना को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया. यह एक संसर्गजन्य परिस्थिति है. इस बीमारी का मुकाबला हम सभी को पूरे धैर्य के साथ करना होगा. इसके लिए सभी प्रशासकीय विभाग सावधान रहें और समर्पित भाव से काम करें. उक्त निर्देश विभागीय आयुक्त डॉ. दीपक म्हैसेकर ने दिए. कोरोना के संदर्भ में कार्रवाई को लेकर काउंसिल हाल में समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में जिलाधिकारी नवलकिशोर राम, पुणे महानगरपालिका आयुक्त शेखर गायकवाड, पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के आयुक्त श्रावण हर्डीकर, अतिरिक्त आयुक्त रुबल अग्रवाल, जिला पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आयुष प्रसाद, अपर जिलाधिकारी साहेबराव गायकवाड, निवासी उपजिलाधिकारी डॉ. जयश्री कटारे, स्वास्थ्य उप संचालक डॉ. संजय देशमुख, बी.जे. वैद्यकीय महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय चंदनवाले, जिल्हा शल्य चिकित्सक डॉ. अशोक नांदापुरकर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भगवान पवार सहित प्रशासन के सभी प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे.

डॉ. म्हैसेकर ने कहा कि इस आपातकालीन स्थिति में प्रशासन के सभी लोगों को मार्गदर्शक निर्देशानुसार अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी क्योंकि यह लापरवाही न सिर्फ आम जनता के लिए घातक होगी, बल्कि प्रशासन के लिए भी घातक ही है. इसके साथ सभी शासकीय-प्रशासकीय कर्मचारियों व अधिकारियों को अपने परिवार का भी विशेष ध्यान रखना होगा और उनका भी मार्गदर्शन कर कैसे इस बीमारी से बचा जा सकता है, इस बारे में मार्गदर्शन करना होगा. म्हैसेकर ने कहा कि काम करते वक्त जहां आवश्यक होगा, वहां मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा. नागरिकों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? इस बारे में अवगत कराया जाएगा, लेकिन हमें अपनी जिम्मेदारी निभाते समय किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जाएगा. परिस्थितिजन्य सभी निर्णय लेने के सभी अधिकार जिलाधिकारी को प्रदान किए गए है. प्रत्येक विभाग को चाहिए कि वे जिलाधिकारी से मिले आदेश का पालन कर अपने कार्य की रिपोर्ट प्रशासन को दें.

जिलाधिकारी नवलकिशोर राम ने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए सभी विभागों को मिशन मोड में काम करना जरूरी है. इस बारे में सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है. तदनुसार संदिग्धों के बारे में जानकारी प्राप्त कर उनके संदर्भ में निर्णय लिए जाए. इसके साथ ही मेडिकल विभाग के सभी लोगों को प्रशासन के साथ सहयोग करना अनिवार्य है. इसमें वैद्यकीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. जिस व्यक्ति को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह व्यक्ति निर्धारित समय में अपनी जिम्मेदारी पूरी करें. जहां जरूरत होगी, वहां एम्बूलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी. वैद्यकीय साधन सामग्री की मांग व स्टॉक के बारे में सावधानी बरतनी होगी. वैद्यकीय विभाग को आवश्यकता पड़ने पर पुलिस विभाग के साथ सहयोग करना भी बंधनकारक होगा. इस कालावधि में शादी समारोह में, सोसाइटियों के नागरिकों के बीच जा कर जनजागृति करने के निर्देश भी जिलाधिकारी ने दिए.