225 फर्जी बैंक खातों में हुआ था करोड़ों का लेन-देन, ऐसे हुआ खुलासा

नोएडा : नोएडा के 225 फर्जी बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा होने का मामला सामने आया है। नोटबंदी के दौरान यह रकम खातों में जमा की गई थी और तीन से चार महीने में धीरे-धीरे करके निकाल ली गई। इस रकम के स्रोत के बारे में जानकारी के लिए जब आयकर विभाग ने बैंकों की ओर से खाताधारकों के मिले पते पर नोटिस भेजे तो वे वापस लौट आए। आयकर विभाग के मुताबिक जानकारी मिली है कि उन पते पर वे लोग रहते ही नहीं हैं। विभाग के अनुसार संभावना है कि काला धन फर्जी खातों में जमा करने के लिए ही यह खाते खोले गए थे। सरकार ने आठ नवंबर 2016 को देशभर में 500 और एक हजार रुपये के नोट को चलन से बाहर कर दिया था। इसका उद्देश्य काले धन पर नियंत्रण के साथ ही जाली नोट से छुटकारा पाना था। आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इसी दौरान करीब 225 बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा हुए थे। कुछ महीने बाद खातों से पैसा निकाल लिया गया।

आयकर विभाग ने बैंकों से मिले खाता धारकों के पते पर नोटिस भेजे थे। नोटिस में उनसे पूछा गया कि यह रकम कहां से आई। अधिकतर नोटिस वापस लौट आए हैं। भेजे गए पते पर लोग मिले ही नहीं। आयकर विभाग के मुताबिक अब उन लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें खाताधारकों ने रकम स्थानांतरित की है। बैंकों से खाताधारक के खाते से किन बैंकों में पैसा स्थानांतरित हुआ है, इसकी जानकारी मांगी जाएगी। कई निजी बैंक आयकर विभाग की रडार पर : आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सभी बैंकों के खातों में रकम जमा हुई है। इसमें सरकारी और निजी बैंक शामिल हैं। वि भाग की रडार पर शहर के सभी बैंक हैं लेकिन निजी बैंकों पर खास नजर है। दिसंबर 2016 में आयकर विभाग ने सेक्टर 51 स्थित निजी बैंक पर छापा मारा था और कई फर्जी खाते सीज किए थे।

आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बैंक खाते में बड़ी रकम की लेनदेन की सूचना तुरंत नहीं देते हैं। बैंक इसमें करीब एक साल का समय लेते हैं। बैंकों से यदि तुरंत जानकारी मिल जाए तो जांच जल्द शुरू हो सकती है। जानकारी के अनुसार नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने ऑपरेशन क्लीन मनी को शुरू किया था। इस ऑपरेशन क्लीन मनी में ही इन खातों का पता चला था। आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इसी दौरान करीब 225 बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा हुए थे। प्रत्येक बैंक खाते में दस लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक जमा किए गए। तीन से चार महीने में इस रकम को निकाल लिया गया। रकम को चेक के जरिए, आरटीजीएस और अन्य तरीकों से निकाला गया। कई खाताधारकों ने रकम का भुगतान अलग-अलग मदों में किया।

आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिन बैंक खातों में पांच करोड़ से दस करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है, उसकी जांच अन्वेषण शाखा कर रही है। इससे कम रकम की जांच बाकी अधिकारी कर रहे हैं। इस मामले में बड़े खुलासे की बात अधिकारी कह रहे हैं। आयकर विभाग और सीबीआई का मानना है कि इस मामले में बैंक के अधिकारियों को क्लीनचिट नहीं दी जा सकती। बैंक अफसर भी संदेह के दायरे में हैं कि आखिर बिना किसी जांच के ये खाते फर्जी रिकॉर्ड पर कैसे खुल गए और नोटबंदी के दौरान कैसे इन खातों में भारी कैश जमा हुआ और उसके बाद पैसे निकाल कर इन खातों को निष्क्रिय भी कर दिया गया। बैंकों के तत्कालीन अधिकारी की भूमिका की जांच होगी।