१५ महीने में आएंगे रेक, चीन से अवतरित होगी मोनो

मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक (सात रास्ता) के बीच मोनो रेल चल रही है। इसके पास अभी ५ रेक हैं। करीब २० किमी लंबे इस रूट पर ४ रेक ही सेवा में हैं। एक रेक इमरजेंसी के लिए रखा गया है। जरूरत के अनुसार पर्याप्त रेक न होने के कारण आधे घंटे में मोनो रेल का परिचालन हो रहा है, जिससे मोनो रेल को यात्रियों का अच्छा प्रतिसाद भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एमएमआरडीए ने १० अतिरिक्त मोनो रेक खरीदने के लिए टेंडर भी निकाला है, जिसकी तकनीकी निविदा खुल चुकी है। इस तकनीकी निविदा में दो कंपनियां आई हैं और ये दोनों ही चीनी हैं। जाहिर है इन दोनों कंपनियों में से जिसे भी ठेका मिले, मुंबई में तो चीनी मोनो ही अवतरित होगी।
मुंबई में फिलहाल आधे घंटे के अंतराल पर मोनो रेल की सेवाएं चलती हैं। ऐसा रेक की कमी के कारण हो रहा है। अब नए रेक लाने की कवायद शुरू हो चुकी है। नए रेक आने के बाद मोनो डार्लिंग की सेवा का अंतराल कम हो जाएगा और यह १५ मिनट में दौड़ेगी। मुंबई में मोनो के जो रेक चल रहे हैं, वो मलेशियाई इंप्रष्ठास्ट्रक्चर फर्म स्कोमी इंजीनियरिंग और लार्सन एंड टूब्रो कंपनी द्वारा निर्मित हैं। इस रेक का जिम्मा और संचालन एमएमआरडीए द्वारा किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एमएमआरडीए के नियम के अनुसार काम न करने और समय पर मोनो रेक मुहैया न करने के कारण स्कोमी इंजीनियरिंग कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। एमएमआरडीए के अधिकारियों का कहना है कि स्कोमी इंजीनियरिंग को ब्लैक लिस्ट किए जाने के कारण चीन की दो कंपनियां सीआरआरसी कॉपोर्रेशन लिमिटेड और बीवायडी ने मोनो के १० रेक सप्लाई करने के लिए टेंडर भरा है। अधिकारी का कहना है कि जिस किसी भी कंपनी को मोनो रेक सप्लाई करने का ठेका मिलेगा, वहां कंपनी १५ महीने में मोनो के १० रेक सप्लाई करेगी। फिलहाल एक कोच की अनुमानित लागत १० करोड़ रुपए बताई जा रही है। ऐसे में १० रेक खरीदने के लिए एमएमआरडीए करीब ४०० करोड़ रुपए खर्च करेगी।
मोनो रेल के ये १० रेक जब यात्री सेवा में शामिल हो जाएंगे तो मोनो रेल की प्रत्येक सेवा १५ मिनट पर संचालित होगी, जिससे मोनो को यात्री मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।