बेसहारा बीमार वृद्ध को कौन देगा इलाज
भिवंडी : राजीव गांधी फ्लाइओवर के आनंद दिघे चौक के नीचे लगभग 70 वर्षीय एक बेसहारा वृद्ध पिछले एक सप्ताह से जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहा है। यह सबसे भीड़भाड़ वाली जगह है लेकिन इस एक हफ्ते में उसे अस्पताल पहुंचाने की जहमत न तो किसी सामाजिक संस्था ने उठाई, न ही भिवंडी मनपा का स्वास्थ्य विभाग आगे आया। बता दें कि ऐसे लोगों के लिए मनपा के पास तीन नाइट शेल्टर भी हैं। भिवंडी शहर पुलिस को भी सूचित किया गया लेकिन उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए।
बता दें कि तीनबत्ती इलाके के रहने वाले दत्तू (70) सप्ताहभर से यहां पड़े हैं। उनकी हालत काफी गंभीर है। चलने-फिरने में तकलीफ है। आस-पास के लोगों का कहना है कि वह तीनबत्ती इलाके में अपनी बहन के घर रहते थे लेकिन, किसी कारण से वह अपनी बहन के परिवार से नाराज होकर यहां चला आए। इसके बाद उन्होंने फ्लाइओवर को सहारा बना लिया। फिलहाल, राह से गुजरने वाले अगर वडा-पाव या चाय-बिस्किट दे देते हैं, तो वह खा लेते हैं, नहीं तो फाके हैं।
यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने इलाज के लिए जब मनपा स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जयवंत धुले को सूचित किया, तो उन्होंने शांतिनगर पुलिस से संपर्क करने के लिए कहकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं, मनपा सड़क किनारे जीवनयापन करने वाले ऐसे लोगों के लिए एसटी स्टैंड के पास, आईजीएम हॉस्पिटल के पास और आजमीनगर इलाके में तीन नाइट शेल्टर चलाती है। इनके ऊपर मनपा लाखों रुपये खर्च भी करती है लेकिन, 500 करोड़ की बजट वाली मनपा के पास ऐसे बेसहारा लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
रविवार को डॉ. धुले से बात करने के बाद उक्त व्यक्ति ने जब शांतिनगर पुलिस स्टेशन में संपर्क किया, तो शांतिनगर पुलिस का कहना था कि राजीव गांधी फ्लाइओवर का इलाका निजामपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। निजामपुर पुलिस स्टेशन से बताया गया कि भिवंडी शहर पुलिस के अंतर्गत आता है। रविवार को जब भिवंडी शहर पुलिस से संपर्क किया गया, तो वहां के ठाणे अमलदार ने बताया कि वृद्ध के इलाज के लिए बीट पुलिस को सूचित कर दिया गया है लेकिन, 4 दिन बीत जाने के बाद भी वृद्ध के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
100 बेड वाले भिवंडी के इकलौते सरकारी अस्पताल में भी ऐसे बेसहारा वृद्ध के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए आईजीएम उपजिला अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. अनिल थोरात को भी सूचित किया गया था। डॉ. थोरात ने बताया कि इसके लिए आईजीएम में कोई व्यवस्था नहीं है लेकिन, यदि पुलिस लेकर आती है, तो प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें सिविल अस्पताल ले जाने के लिए ऐंबुलेंस की व्यवस्था हो जाएगी, जहां उनका इलाज हो सकेगा लेकिन, भिवंडी शहर पुलिस उन्हें आईजीएम अस्पताल तक ले जाने के लिए तैयार नहीं है।
