चंद्रयान पर सस्पेंस ’ग्रहण’ : वैज्ञानिक डेटा एनालिसिस में जुटे

 मुंबई :  मिशन मून के तहत चंद्रयान-२ के लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद भी निर्धारित लक्ष्य को पाने की भारत की कोशिशें जारी हैं। इसरो अब भी आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रयान-२ के चांद पर उतरने से ठीक पहले लैंडर से संपर्क टूटने से चंद्रयान पर सस्पेंस का ग्रहण लग गया।
चंद्रयान-२ के लैंडर से संपर्क टूटने को लेकर वैज्ञानिक और देश की उत्सुक जनता को थोड़ी निराशा हुई लेकिन
उम्मीद पर दुनिया कायम है। विक्रम लैंडर फिर से काम करेगा, इसी उम्मीद के साथ इसरो वैज्ञानिक अब भी काम कर रहे हैं। इसरो से जुड़े सूत्रों के अनुसार ऐसी आशंका है कि विक्रम लैंडर चांद की सतह पर व्रैâश हो गया है। अब ऑर्बिटर की मदद से उसकी तस्वीर लेने की कोशिश की जा रही है। साथ ही वैज्ञानिक विक्रम लैंडर के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के डेटा से ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर २.१ किमी की ऊंचाई पर क्यों वह अपने रास्ते से भटक गया। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर वैसा ही यंत्र होता है, जैसे किसी विमान का ब्लैक बॉक्स। इसरो के सूत्रों ने बताया कि चांद की सतह से २.१ किमी की ऊंचाई पर विक्रम अपने तय रास्ते से भटक गया था। इसके बाद वह ६० मीटर प्रति सेकंड की गति से ३३५ मीटर तक आया। ठीक इसी जगह उसका पृथ्वी पर स्थित इसरो सेंटर से संपर्क टूट गया।
लैंडर से संपर्क होगा स्थापित