शिवाजी महाराज के किलों को हाथ नहीं लगाएंगे : पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल

मुंबई : राज्य में स्थित किलों को हेरिटेज होटल में रूपांतरित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों को हाथ नहीं लगाया जाएगा। किलों पर विवाह  समारोह और कार्यक्रम नहीं होंगे। यह बात राज्य के पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल ने कही। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सरकार ने होटल बनाने तथा शादी समारोह के  लिए राज्य ने गढ़-किलों को लीज पर देने का मन बनाया है। पर्यटन मंत्री रावल ने कहा कि किलों को लेकर गलत अफवाह फैलाई जा रही है। सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है।  उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में तीन प्रकार के किले हैं। पहले प्रकार के किलों में शिवाजी महाराज के किले आते हैं। दूसरे प्रकार में पुरातत्व विभाग अंतर्गत ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण किले आते हैं तथा तीसरे प्रकार में गांवों में स्थित उपेक्षित किले आते हैं। तीसरे प्रकार के किलों को बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक नीति तैयार की है। उन्होंने  कहा कि तीसरे प्रकार के किलों में रखवाली के लिए एक गार्ड तक नहीं रहते। ऐसे किले राजस्व विभाग और पर्यटन विभाग के अंतर्गत आते हैं। इन किलों के विकास, देखभाल और  मरम्मत करने के लिए सरकार ने एक नई नीति तैयार की है। ये किले ढह गए हैं और वर्तमान में खंडहर बन गए हैं। इन किलों का विकास कर वहां लाइट एंड साउंड शो, संग्रहालय  सहित रहने और भोजन उपलब्ध कराने की सुविधा दी जाएगी। रावल ने कहा कि ये किले गोद लेकर विकसित करने के आधार पर कुछ सालों के लिए दिए जाएंगे। रावल ने कहा कि  बड़े किलों को हाथ नहीं लगाया जाएगा। छोटे किलों को विकसित किया जाएगा। आज ऐसे अनेक छोटे किले हैं, जो पूरी तरह उपेक्षित दिखाई देते हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर  प्रदेश, गोवा सहित सभी राज्यों में किलों को लेकर यही नीति है। सर्वाधिक किले महाराष्ट्र में है, लेकिन दुर्भाग्य से यह नीति नहीं है। पहले की सरकार ने किलों को लेकर कोई नीति  नहीं बनाई। इतना ही नहीं अपने विधानसभा क्षेत्रों में किलों के लिए एक पैसा तक नहीं दिया गया। इधर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज  के सिपाहियों ने जिन किलों को जीतने के लिए अपना खून बहाया था, उन ऐतिहासिक किलों पर कभी भी होटल नहीं बनाएं जाएंगे। पर्यटन मंत्रालय की ओर से विकास के लिए  उपलब्ध कराएं गए किले संरक्षित किलों में से नहीं है। फिर भी विपक्ष ने गलत सूचना के आधार पर आलोचना शुरू की है है और वे जनता में भ्रम पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुछ किलों का संवर्धन किया जा रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी रायगढ़ और उसके साथ ही अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किलों  के संवर्धन और विकास के लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान किया गया है। इस ऐतिहासिक विरासत को जतन करने के लिए सरकार वचनबद्ध है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि  धरोहर होटलों और विवाह स्थलों के लिए किलों को किराए पर देने की योजना छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके समर्थकों का अपमान है।