सहकारी बैंक घोटाले का मामला पहुंचा सुप्रिम कोर्ट

मुंबई : महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आज सोमवार को इस मामले में सुनवाई होगी। मुंबई हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई   है। अमरीश शिवराज पंडित, आनंद राव सहित 6 लोगों ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल, 22 अगस्त को मुंबई हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक  अपराध शाखा (ईओडŽल्यू) को महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार सहित 70 लोगों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। मुंबई पुलिस ने  महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में मुंबई हाई कोर्ट के निर्देशों पर 26 अगस्त को राकांपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार तथा अन्य  पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार 10 नवंबर 2010 से 26 सितंबर 2014 तक उपमुख्यमंत्री रहे थे। एक अधिकारी ने  बताया था कि अन्य आरोपियों में पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के नेता जयंत पाटिल और राज्य के 34 जिलों में बैंक इकाई के अधिकारी शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया था, हमने  आर्थिक अपराध शाखा की शिकायत पर एमआरए मार्ग थाने में मामला दर्ज किया है। उन पर आईपीसी की धारा 420 (ठगी और बेईमानी), 409 (नौकरशाह या बैंकर, व्यवसायी या  एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वास हनन), 406 (आपराधिक विश्वास हनन के लिए सजा), 465 (धोखाधड़ी के लिए सजा), 467 (मूल्यवान चीजों की धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक  षड्यंत्र की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एसके शिंदे की पीठ ने 22 अगस्त को कहा था कि मामले में  आरोपियों के खिलाफ 'ठोस साक्ष्य' हैं और ईओडŽल्यू को पांच दिन के अंदर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एमएससीबी को 2007 और 2011 के बीच एक हजार करोड़ रुपए  का नुकसान हुआ था, जिसमें आरोपियों की कथित तौर पर मिलीभगत थी। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की जांच के साथ ही महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज  कानून के तहत अर्द्ध न्यायिक जांच आयोग की तरफ से दायर आरोप पत्र में नुकसान के लिए पवार और अन्य आरोपियों के 'निर्णयों, कार्रवाई और निष्क्रियताओं' को जिम्मेदार   ठहराया गया था। स्थानीय कार्यकर्ता सुरिंदर अरोड़ा ने 2015 में ईओडŽल्यू में शिकायत दर्ज कराई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।