सेस इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ
मुंबई : मुंबई शहर में तकरीबन 16 हजार से अधिक जर्जर और क्षतिग्रस्त इमारतों के तेजी से पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। सरकार की तरफ से उपकर प्राप्त इमारतों (सेस) के पुनर्विकास के लिए आवश्यक गाइड लाइन जारी करने तथा सेस इमारतों के पुनर्विकास के लिए म्हाडा को प्लानिंग अथॉरिटी के रूप में नियुक्त करने संबंधी निर्णय को कैबिनेट ने हरी झंडी प्रदान की है। मुंबई शहर में उपकर (सेस) व बगैर उपकर प्राप्त इमारतों सहित महाराष्ट्र गृह निर्माण व क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) से संबंधित इमारतों की समस्याओं को देखते हुए इस संबंध में नीतिगत निर्णय लेना आवश्यक था। इस बारे में सरकार को सुझाव देने के लिए विधान मंडल के 8 सदस्यों की समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट, डोंगरी में इमारत हादसे की घटना के बाद मुख्यमंत्री की तरफ से दिए गए निर्देश तथा गृह निर्माण मंत्री के समय-समय पर दिए गए निर्देशों के अनुसार कैबिनेट बैठक में विभिन्न बातों को मंजूर किया गया।
मुंबई शहर में जिन उपकर प्राप्त इमारतों के पुनर्विकास को बिल्डर ने अधूरी अवस्था में छोड़ा है, साथ ही बिल्डर निवासियों को किराया नहीं दे रहा है, ऐसी परियोजना म्हाडा के माध्यम से पूरी की जाएगी। महानगरपालिका की धारा 353 या 354 के अनुसार नोटिस दिए गए उपकर प्राप्त इमारतों के पुनर्विकास के लिए मालिक या इमारत में रहने वाले लोगों की प्रस्तावित गृह निर्माण सोसाइटी को 6 माह का समय देकर पुनर्विकास का प्रस्ताव पेश करने का अवसर देने, इस अवधि में प्रस्ताव पेश न करने पर म्हाडा की तरफ से भू- संपादन कर ऐसी इमारतों का पुनर्विकास करने को लेकर म्हाडा अधिनियम 1976 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश निकाला जाएगा। मुंबई शहर में सेस व इससे जुड़ी बगैर उपकर प्राप्त इमारतों का म्हाडा के मार्फत शहरी नवीनीकरण योजना के तहत समूह पुनर्विकास करने के लिए विकास नियंत्रण व प्रोत्साहन नियमावली (डीसीपीआर) में आवश्यकतानुसार संशोधन नगर विकास विभाग की तरफ से किए जाएंगे। मुंबई शहर की सेस इमारतों के पुनर्विकास के लिए म्हाडा को प्लॉनिंग अथॉरिटी के रूप में घोषित किया गया है। मुंबई शहर की सेस इमारतों के पुनर्विकास के लिए डेवलपर के पंजीकरण और डेवलपर की पात्रता का निर्धारण करने, डेवलपर की तरफ से किराए के अग्रिम भुगतान के लिए एस्क्रो एकाउंट खोलने, पुनर्विकास में निर्माण कार्य पर निगरानी रखने के लिए सतर्कता समिति गठित करने के साथ ही म्हाडा अधिनियम 1976 की धारा 103 के तहत भूसं पादित की गई संपत्ति के पुनर्विकास को बढ़ावा देने जैसी बातों को लेकर आवश्यक मागदर्शक सूचना को जारी करने को मंजूरी प्रदान की गई।
