जलवायु परिवर्तन के कारण आइसलैंड के ग्लेशियर 'ओकजोकुल' का अस्तित्व हुआ खत्म
जलवायु परिवर्तन के कारण आइसलैंड के ग्लेशियर 'ओकजोकुल' ने अपनी पहचान खो दी है। अपना अस्तित्व खोने वाला यह दुनिया का पहला ग्लेशियर बन गया। शनिवार को आइसलैंड के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ओकजोकुल से ग्लेशियर का दर्जा वापस ले लिया गया। एक अनुमान है कि अगले 200 साल में दुनिया के सभी ग्लेशियर खत्म हो जाएंगे।
आइसलैंड की पहचान था ओकजोकुल ग्लेशियर
700 साल पुराना यह ग्लेशियर आइसलैंड देश के सबसे प्राचीन ग्लेशियरों में से एक था
2014 में इस ग्लेशियर को मृत घोषित कर दिया गया क्योंकि यह पूरी तरह पिघल चुका था
50 साल से ग्लेशियर के फोटो ले रहे पर्यावरणविद सायमीनी हावे ने पहली बार ओकजेाकुल की पिघली बर्फ पर चेताया था
2035 तक नष्ट हो सकते हैं हिमालयी ग्लेशियर
भारत में गढ़वाल हिमालय में ग्लेशियर इतनी तेजी से पीछे हट रहे हैं कि शोधकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश मध्य और पूर्वी हिमालयी ग्लेशियर 2035 तक गायब हो सकते हैं।
समुद्र जलस्तर बढ़ेगा
ग्लेशियर की स्थिति वैश्विक ताप और जलवायु परिवर्तन के अहम संकेतक हैं। साथ ही ग्लेशियर पिघलने से समुद्र के जल का स्तर बढ़ता है जिससे समुद्र का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।
269 ग्लेशियर वाला देश है आइसलैंड
उत्तरी अटलांटिक में स्थित आइसलैंड एक नॉर्डिक द्वीप देश है। यहां कुल 269 ग्लेशियर हैं जो इस देश का 11 प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं। अब यहां के कई छोटे-बड़े ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिसका कारण दुनिया के दूसरे भागों में पर्यावरण प्रदूषण बढ़ना है।
