ऐप लगाएगा मनचलों पर लगाम
मुंबई : कड़े कानूनों एवं पुलिस की कड़ी सतर्कता के बाद भी महिलाओं से छेड़छाड़ आज आम घटना बन चुकी है। रेलवे स्टेशन, ट्रेन, बस, बाजार जैसे सार्वजनिक जगहों पर महिला सबसे ज्यादा छेड़छाड़ की शिकार होती हैं। अब तो मुहल्ले में एवं घर में भी महिलाओं खासकर बच्चियों के साथ लैंगिक शोषण के मांमले सामने आने लगे हैं लेकिन अब मनचलों को खुद पर नियंत्रण रखना होगा। अन्यथा उनकी शामत आ जाएगी। उनकी पिटाई भी होगी और उन्हें हवालात भी जाना पड़ेगा क्योंकि अब एक ऐसा ऐप आ गया है, जो मनचलों को छेड़छाड़ से रोकेगा।
बता दें कि टोक्यो पुलिस ने महिलाओं से छेड़छाड़ रोकने के लिए इस एंटी ग्रॉपिंग ऐप को ईजाद करवाया है। इसे डिजी पुलिस ऐप नाम दिया गया है। स्मार्टफोन में चलनेवाला यह ऐप जापान में स्त्रियों के बीच पसंदीदा ऐप बन गया है। छेड़खानी होने पर महिलाएं डिजी पुलिस ऐप की मदद ले सकती हैं, जो या तो तेज आवाज में मैसेज देता है- स्टॉप इट (इसे रोको) या मोबाइल की पूरी स्क्रीन पर एसओएस (इमरजेंसी कॉन्टेक्ट को सूचना) संदेश दिखाता है। इस संदेश में लिखा होता है- यहां एक मोलेस्टर (छेड़खानी करनेवाला) है, कृपया मदद कीजिए। मुझे इससे समस्या है। इस मैसेज को पीड़िता आस-पास उपस्थित अन्य लोगों की मदद ले सकती है। पुलिस ऑफिसर के इको टॉयमाइन ने कहा, इस ऐप को २.३७ लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। किसी पब्लिक सर्विस ऐप के हिसाब से यह निश्चित रूप से बड़ा आंकड़ा है। टॉयमाइन ने बताया कि इस ऐप की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है व हर महीने लगभग १०,००० नए यूजर्स इस ऐप को डाउनलोड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित अक्सर मदद के लिए बुलाने से डरते हैं मगर एसओएस संदेश मोड का उपयोग करके वे अन्य यात्रियों को चुप रहते हुए भी छेड़खानी करनेवाले के बारे में जानकारी दे सकते हैं। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष २०१७ में टोक्यो में ट्रेनों व सब-वे पर लगभग ९०० छेड़खानी व अन्य उत्पीड़न के मामले सामने आए थे। पुलिस का मानना है कि असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है क्योंकि अक्सर इसके शिकार लोग सामने आने से बचते हैं।
