मुंबई और पुणे के बीच हाइपरलूप

मुंबई : मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को मुंबई-पुणे हाइपरलूप परियोजना को एक बुनियादी ढांचा परियोजना और डीपी वर्ल्ड एफजेडई और हाइपरलूप टे€नोलॉजीज, इंक के भागीदारी समूह  को मूल परियोजना प्रस्तावक के रूप में घोषित करने को मंजूरी प्रदान की गई। हाइपरलूप के जरिए कुर्ला बीकेसी से वाकड के बीच 117.50 किलोमीटर की दूरी मात्र 23 मिनट में पूरी होगी।

मुंबई-पुणे हाइपरलूप परियोजना दो महानगरों को हायपरलूप तकनीक से जोड़ने वाली प्रस्तावित अत्याधुनिक परिवहन परियोजना है। बीकेसी से वाकड के बीच 117.50 किलोमीटर की  दूरी के बीच यह परियोजना लगाई जाएगी। इस परियोजना में तकरीबन 70 हजार करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा। इतने बड़े निवेश की देश में यह पहली परियोजना है।  विशेष बात यह है कि बेहद गतिमान यात्रा वाली दुनिया की यह पहली हाइपरलूप परियोजना है। इस परियोजना में प्रस्तावित गति 496 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इससे पुणे और  मुंबई के बीच की यात्रा सिर्फ 23 मिनट में पूरी हो जाएगी। पहले चरण में तकरीबन पांच हजार करोड़ खर्च होंगे और इस चरण में 11.80 किलोमीटर के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में  पुणे महानगरपालिका क्षेत्र में निर्माण कार्य किए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट दो से ढाई साल में शुरू होगा। इसके बाद बाकी बची परियोजना को पूरा किया जाएगा। संपूर्ण परियोजना 6 से  7 साल में पूरी होगी। पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण मार्फत लागू होने वाली पुणे मुंबई हायपरलूप परियोजना को आधारभूत सुविधा के रूप में घोषित करने व डीपी वर्ल्ड एफजेडई और हाइपरलूप टे€नोलॉजीज, इंक के भागीदारी समूह को मूल परियोजना प्रस्तावक के रूप में घोषित करने को मंजूरी प्रदान की गई। नीति आयोग ने इस विशेष परियोजना  के लिए पहल की है। इस परियोजना के पूरा होने पर देश के परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत होगी।