कहीं डब्बा तो नहीं अमेरिकी ड्रोन! दगा दे गया ड्रोन
मुंबई : अमेरिका के ड्रोन कहीं डब्बा तो नहीं हैं? ये सबसे बड़ा सवाल अब खड़ा हो गया है। ईरान ने अमेरिका के खुफिया ड्रोन को मार गिराया है। एमक्यू-४ सी ट्राइटन ड्रोन जासूसी में माहिर माना जाता है। लेकिन ईरान की सुरक्षा प्रणाली के सामने उसके परखच्चे उड़ गए। इसके पहले हिंदुस्थान के मिग-२१ लड़ाकू विमानों ने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिये गए एफ-१६ विमान को मार गिराया था। एफ-१६ अत्याधुनिक श्रेणी के जंगी जहाज माने जाते हैं जिसे अमेरिका मल्टिरोल, एयर सुपिरियॉरिटी बताकर बेचता रहा है। अमेरिका जंगी सामानों की इन दो बड़ी असफलताओं के कारण अब शक हिंदुस्थान की डील पर है।
हिंदुस्थान अमेरिका से ३० सी-गार्जियन सशस्त्र ड्रोन (प्रीडेटर-बी) खरीद रहा है। अमेरिकी सरकार ने ऐसे २२ ड्रोन हिंदुस्थान को बेचने की अनुमति भी दे दी है लेकिन ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन मार गिराने की घटना ने इस डील पर सवाल खड़े कर दिये हैं। इसके पहले हिंदुस्थान के पुराने हो चुके मिग-२१ लड़ाकू विमान ने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिये गए शक्तिशाली एफ-१६ विमान को मार गिराया। इसके साथ एफ-१६ की क्षमता को लेकर अमेरिकी दावों की भी कलई खुल गई। ईरान द्वारा ड्रोन गिराने और हिंदुस्थान के मिग-२१ द्वारा अमेरिकी एफ-१६ को मार गिराना हिंदुस्तान की डिफेंस डील पर बड़ा सवालिया निशान है कि अमेरिका के दावों और यथार्थ में बड़ा अंतर है और उसके अतिसुरक्षित बताए जाने वाले लड़ाकू विमान और ड्रोन कहीं महंगे डब्बे तो नहीं हैं। बता दें कि जिस ड्रोन को ईरान ने मार गिराया है उसे एमक्यू-४सी ट्राइटन कहा जाता है इसने यू-२ जासूसी प्लेन की जगह ली है। यह ड्रोन ५६,००० फीट की उंचाई पर उड़ने में सक्षम है। इसके मार गिराए जाने के पीछे जो सवाल खड़ा हुआ है वो है कि इस ड्रोन को सिर्फ राडार गाडेड मिसाइल से ही गिराया जा सकता है। जो कि रूस निर्मित एस-३०० हो सकता है जो ईरान के पास है। इससे अमेरिका को तगड़ा झटका लगा है क्योंकि तेहरान ने अमेरिका के जिस ड्रोन को गिराया है, वह उसके सबसे शक्तिशाली ड्रोनों में से एक है। पिछले साल मई में ही अमेरिका ने इसे नेवल ड्रोन के तौर पर शामिल किया था। अमेरिकी २०३२ तक अपने बेड़े में ऐसे ६८ ड्रोन शामिल करना चाहता है। उसका यह जासूसी विमान ३० घंटे ५६,००० फीट की ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है। इसमें जबर्दस्त सेंसर लगे हैं जो फुल मोशन विडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं और सटीक तरीके से टारगेट को ट्रैक कर सकते हैं। इसमें रॉल्स रॉयस के इंजन लगे हैं। ड्रोन ५० फीट लंबा है और पंख की लंबाई १३० फीट है। यह ३६८ मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। दूसरी तरफ जो सी गार्जियन (प्रीडेटर-बी) ड्रोन हिंदुस्थान खरीद रहा है वो एमक्यू-१ से पंद्रह गुना ज्यादा वजनी आयुध ढोने और तीन गुना ज्यादा गति से उड़ सकने में सक्षम है। इसे एयर क्रू मॉनिटर कंट्रोल या ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें ९५०-शाफ्ट हॉर्स पावर टर्पो प्रॉप इंजन लगा हुआ है जिससे ये लगातार ४० घंटे उड़ सकता है। फाइटर जेट की ही तरह ये ड्रोन दुश्मनों पर मिसाइल से वार करने में सक्षम हैं। वे लंबी दूरी तक निरीक्षण करने और सुरक्षित तरीके से टारगेट पर वार करने में कामयाब माने जाते हैं। इसमें अडवांस लेवल का जीपीएस इस्तेमाल होगा जो दुश्मन को बचकर निकलने नहीं देगा। जबकि इसकी टोह लेना आम राडार के बस की बात नहीं है लेकिन ईरान के सुरक्षा तंत्र की कामयाबी ने अमेरिकी दावों को धता बता दिया है।
