पत्रकार की हत्या के 16 साल बाद राम रहीम को उम्रकैद

चंडीगढ़ , साध्वी यौन शोषण के मामले में सुनारिया जेल में सजा भुगत रहे डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 16 साल पुराने मामले में कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद की सजा का ऐलान किया है। इस मामले में राम रहीम के अलावा तीन अन्य दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा सभी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा दी गई अर्जी के बाद सजा का ऐलान विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। सजा के ऐलान से पहले सीबीआई ने कोर्ट से गुरमीत राम रहीम को फांसी देने की मांग की थी। 

साध्वी यौन शोषण मामले में सुनवाई के बाद पंचकूला में हिंसा की बात को ध्यान में रखते हुए पंजाब और हरियाणा में सुरक्षा व्यवस्था का खास प्रबंध किया गया। सिक्यॉरिटी के मद्देनजर सुरक्षाबल चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से निपटा जा सके। 

खबर प्रकाशित करने पर हुई थी हत्या 

गौरतलब है कि वर्ष 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरअसल, छत्रपति अपने समाचार पत्र में डेरा से जुड़ी खबरों को प्रकाशित करते थे। पत्रकार छत्रपति की हत्या के बाद परिजनों ने मामला दर्ज कराया था और बाद में इसे सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। सीबीआई ने 2007 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और इसमें डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का आरोपी माना था। 

इन धाराओं के तहत दोषियों पर ऐक्शन 

पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और कृष्ण लाल को आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश रचने) और 302 के तहत दोषी करार दिया, जबकि कुलदीप सिंह तथा निर्मल सिंह को आईपीसी की धारा 302 ( हत्या की सजा) और 120बी (आपराधिक साजिश) का दोषी बताया। निर्मल सिंह को आर्म्स एक्ट 1959 के सेक्शन 25 तथा कृष्ण लाल को आर्म्स एक्ट 1959 के सेक्शन 29 के तहत भी दोषी करार दिया गया।