जोगेश्वरी का ठग सायरस कात्रक प्रेमिका की वजह से पहुंचा जेल

मुंबई , हर इंसान में कुछ कमजोरियां होती हैं और वो कमजोरियां कानून की नजर से भी छिप नहीं पातीं। 22 करोड़ रुपये की ठगी के एक आरोपी सायरस कात्रक की तीन दिन पहले सलाखों के पीछे पहुंचने की कहानी भी उसकी एक कमजोरी से जुड़ी है। वह कमजोरी थी उसकी गर्लफ्रेंड। 6 करोड़ रुपये से ऊपर के ठगी के केस पुलिस स्टेशन नहीं, आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW देखती है लेकिन सायरस को जब एक साल तक EOW नहीं 

दरअसल, ठगी का यह केस साल 2014 का है। कोर्ट में उस साल आरोपी ने अपनी कुछ दलीलें रखीं, कोर्ट ने उसे जमानत देने के लिए अपनी कुछ शर्तें रखीं लेकिन आरोपी बाद में कोर्ट का ही भरोसा तोड़कर भाग गया। साल 2017 में उसके खिलाफ वॉरंट निकाला गया लेकिन जब वह एक साल बाद भी गिरफ्तार नहीं हो पाया तो मामला सीधा पुलिस कमिश्नर सुबोध जायसवाल के पास गया। 

जब मुंबई सीपी को पता चला कि आरोपी जोगेश्वरी का रहने वाला है तो उन्होंने जोन-9 के डीसीपी परमजीत सिंह दाहिया को सायरस को लोकेट करने का आदेश दिया। डीसीपी ने एक टीम बनाई, जिसमें सीनियर इंस्पेक्टर भरत गायकवाड़, इंस्पेक्टर राजेंद्र कलमकर, प्रकाश नागे के अलावा सिपाही काले, गागुर्डे और पावरे को भी रखा गया। जांच टीम को EOW से सायरस कात्रक की पूरी फाइल मिल गई थी। उसी में जब उसका घर का पता जोगेश्वरी स्टेशन के पास का मिला तो एक दिन टीम उस घर पहुंच गई। घर में उस वक्त उसकी मां और भाई थे। उन दोनों से जब उसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा उन्हें खुद पता नहीं कि वह कहां है? जांच अधिकारियों के पास यह जानकारी भी थी कि सायरस की शादी हो चुकी है और उसके एक बच्चा भी है लेकिन जोगेश्वरी के घर में पुलिस को पत्नी और बच्चा मिले ही नहीं। तो फिर दोनों कहां है? जवाब के लिए जांच टीम को कहीं से पत्नी का नंबर मिल गया। उसे इस नंबर से बहुत लोकेट करने की कोशिश की लेकिन वह कहीं नहीं मिली।  

पत्नी के बारे में जानकारी निकालते-निकालते जांच टीम को दो नई बातें पता चलीं। पहली तो यह कि सायरस ने अपना नाम बदल दिया है। अब वह साजिद खान बन गया है। दूसरी जानकारी यह मिली कि उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है। पुलिस अधिकारियों को कहीं से इस गर्लफ्रेंड का नंबर मिल गया लेकिन वह गर्लफ्रेंड हर पांच-छह दिन में अपना सिम ही बदल देती। हर सिम का लोकेशन महाराष्ट्र में अलग-अलग जगह दिखता। कभी मीरा रोड आता, कभी नालासोपारा या वसई-विरार में। बाद में पता चला कि वह कुछ दिनों से महाबलेश्वर के पास पंचगनी में है, इसके बाद पुलिस टीम वहां गई। वहां जब इस गर्लफ्रेंड के बारे में और जानकारी निकाली गई तो पता चला कि उसके दो बच्चे हैं और वे पचंगनी में ही किसी होस्टल में रहते हैं। जानकारी निकाली गई कि बच्चों से मिलने यह गर्लफ्रेंड कब आती है। उसी के बाद उसके खिलाफ ट्रैप लगाया गया। वह पकड़ में आई तो सायरस कात्रक की गिरफ्तारी महज औपचारिकता हो गई। पूछताछ में पता चला कि पूरे राज्य में किराये के घर लेने के लिए उसने और उसकी गर्लफ्रेंड ने हर जगह अपनी अलग पहचान बताई, अलग पेशा बताया और उनसे जुड़े अलग दस्तावेज पेश किए, ताकि कानून और लोगों से उनकी मूल शिनाख्त छिपी रहे लेकिन जब उनका नकाब उतरा तो अंबोली पुलिस ने एक साल बाद ही सही, कोर्ट को सायरस कात्रक का असली चेहरा दिखा ही दिया।